दिग्गज टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविच भले ही विंबलडन 2026 के सेमीफाइनल में जेनिक सिनर से सीधे सेटों में हार गए हों, लेकिन इंटरनेट पर उनकी एक खास तस्वीर को लेकर खूब चर्चा हो रही है। सोशल मीडिया यूजर्स ने जोकोविच के दाहिने कान पर छोटे-छोटे स्टड्स (दबाव बिंदु वाले छोटे दाने) का एक समूह देखा। ब्रिटिश एक्यूपंक्चर काउंसिल के अनुसार, इन्हें 'ईयर सीड्स' (Ear Seeds) कहा जाता है, जिसका उपयोग शारीरिक रिकवरी, दर्द से राहत, मानसिक शांति और बेहतर नींद के लिए किया जाता है।
आइए जानते हैं कि पारंपरिक चीनी चिकित्सा का यह हिस्सा क्या है और इस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों की क्या राय है।
क्या होते हैं 'ईयर सीड्स'?
ईयर सीड्स छोटे, त्वचा को बिना नुकसान पहुंचाए लगाए जाने वाले पेलेट्स (pellets) होते हैं। ये आमतौर पर 'वैकेरिया' (Vaccaria) पौधे के बीजों, या फिर छोटी धातुओं या चुंबकीय मोतियों से बने होते हैं। इन्हें एक खास एडहेसिव टेप की मदद से कान के बाहरी हिस्से के विशिष्ट बिंदुओं पर चिपकाया जाता है।
- यह चिकित्सा पद्धति ऑरीकुलोथेरेपी (Auriculotherapy या कान का एक्यूप्रेशर) के सिद्धांतों पर काम करती है। इसके अनुसार, हमारे कान के अलग-अलग हिस्से शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों से जुड़े होते हैं।
- कान के एक्यूप्रेशर बिंदु (Ear Acupressure Points).
- विशेषज्ञों के मुताबिक, इन बिंदुओं पर हल्का और निरंतर दबाव डालने से शरीर में संतुलन और सेहत को बढ़ावा मिलता है।
क्या कहता है आधुनिक विज्ञान?
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (Modern Medical Science) के नजरिए से ईयर सीड्स के फायदों को लेकर सीमित प्रमाण उपलब्ध हैं:
- पुख्ता वैज्ञानिक सबूतों की कमी: डॉक्टरों का कहना है कि दर्द, चिंता, अनिद्रा या जी मिचलाने जैसी समस्याओं के लिए कान के एक्यूप्रेशर पर कुछ छोटे अध्ययन जरूर हुए हैं, लेकिन उनके परिणाम एक जैसे नहीं रहे हैं। फिलहाल ऐसा कोई मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि ईयर सीड्स किसी बीमारी का इलाज कर सकते हैं या किसी एथलीट के प्रदर्शन को बढ़ा सकते हैं।
- प्लेसिबो इफेक्ट (Placebo Effect): कई बड़े एथलीट अपनी दिनचर्या में वैकल्पिक वेलनेस तौर-तरीकों को शामिल करते हैं। अगर किसी को लगता है कि इससे उन्हें मानसिक शांति या ध्यान केंद्रित करने में मदद मिल रही है, तो यह उनके व्यक्तिगत विश्वास या 'प्लेसिबो इफेक्ट' के कारण हो सकता है, न कि किसी सीधे शारीरिक लाभ की वजह से।खेल प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए आज भी वैज्ञानिक रूप से स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग, पर्याप्त नींद, अच्छा पोषण और मानसिक तैयारी को ही सबसे कारगर माना जाता है।
ईयर सीड्स का उपयोग करते समय बरतें ये सावधानियां
विशेषज्ञों ने इसे आजमाने से पहले कुछ जरूरी हिदायतें भी दी हैं:
- संक्रमित या घायल त्वचा पर न लगाएं: यदि कान की त्वचा पर कोई घाव, इंफेक्शन या एक्जिमा है, तो ईयर सीड्स का इस्तेमाल बिल्कुल न करें।
- समस्या होने पर तुरंत हटाएं: यदि इन्हें लगाने के बाद कान में लालिमा, सूजन, दर्द, खुजली या कोई डिस्चार्ज (पानी आना) दिखाई दे, तो इन्हें तुरंत हटा देना चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
- डॉक्टर की सलाह जरूरी: यदि किसी को कान की पुरानी बीमारी है, हाल ही में कान की सर्जरी हुई है, या टेप से एलर्जी है, तो उन्हें इस थेरेपी को आजमाने से पहले किसी स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष:
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि ईयर सीड्स को केवल एक पूरक वेलनेस थेरेपी (Complementary Practice) के रूप में देखा जाना चाहिए। इसे डॉक्टर द्वारा बताए गए मुख्य इलाज या मेडिकल केयर के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यदि कान में दर्द, बहरापन, चक्कर आना या टिनिटस (कान में आवाजें आना) जैसी कोई गंभीर समस्या है, तो वैकल्पिक थेरेपी के भरोसे रहने के बजाय तुरंत किसी ईएनटी (ENT) विशेषज्ञ से जांच करवानी चाहिए।