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रिलेशनशिप में क्या है 'गोल्डन रिट्रीवर एनर्जी'? जानें पार्टनर में इस खूबी को ढूंढने के फायदे और नुकसान

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Posted On:Monday, July 13, 2026


सोशल मीडिया और डेटिंग की दुनिया में इन दिनों एक नया शब्द काफी चर्चा में है—'गोल्डन रिट्रीवर एनर्जी' (Golden Retriever Energy)। लोग अक्सर अपने लाइफ पार्टनर या डेटिंग ऐप की प्रोफाइल में इस खूबी का जिक्र करते हैं। लेकिन एक रिश्ते में 'गोल्डन रिट्रीवर एनर्जी' होने का असल मतलब क्या है? क्या वाकई हर किसी को ऐसे पार्टनर की जरूरत होती है?
कैडाबाम्स हॉस्पिटल्स की सीनियर साइकोलॉजिस्ट और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नेहा कैडाबम ने इस अनोखे रिलेशनशिप ट्रेंड के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर रोशनी डाली है।
क्या होती है 'गोल्डन रिट्रीवर एनर्जी'?
यह शब्द 'गोल्डन रिट्रीवर' नस्ल के कुत्तों के मिलनसार और वफादार स्वभाव से लिया गया है। मनोविज्ञान की भाषा में, जब किसी पार्टनर में अत्यधिक गर्मजोशी (warmth), वफादारी (loyalty), उत्साह और हर परिस्थिति में सकारात्मक (unconditional positivity) रहने जैसे गुण होते हैं, तो उसे 'गोल्डन रिट्रीवर एनर्जी' कहा जाता है।
ऐसे पार्टनर बहुत भरोसेमंद, प्यार जताने वाले और रिश्ते में हमेशा खुशियां बिखेरने वाले होते हैं। इनके साथ होने से रिश्ते में एक सुरक्षित और खुशनुमा माहौल बना रहता है।
इस एनर्जी को चाहने के पीछे के नुकसान (The Downside)
साइकोलॉजिस्ट नेहा कैडाबम चेतावनी देती हैं कि सुनने में यह स्वभाव जितना आदर्श लगता है, असल जिंदगी में इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं:

  • अवास्तविक उम्मीदें (Unrealistic Expectations): इंसान होने के नाते हर व्यक्ति के मूड में उतार-चढ़ाव आते हैं। अपने पार्टनर से हमेशा हंसमुख और सकारात्मक रहने की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।
  • भावनाओं को दबाना: यदि आप पार्टनर से लगातार 'गोल्डन रिट्रीवर' की तरह खुश रहने की उम्मीद करेंगे, तो वे अपनी उदासी, गुस्सा या चिंता को छिपाने लगेंगे। इससे वे अंदर ही अंदर मानसिक रूप से थक सकते हैं (burnout)।
  • गंभीर समस्याओं को नजरअंदाज करना: हर वक्त सकारात्मक रहने की चाहत में कई बार कपल्स रिश्ते के गंभीर विवादों या पार्टनर की अंदरूनी मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो भविष्य के लिए ठीक नहीं है।
क्या यह किसी अधूरी मानसिक जरूरत का संकेत है?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, किसी पार्टनर में 'गोल्डन रिट्रीवर एनर्जी' को शिद्दत से तलाशना आपकी किसी गहरी भावनात्मक जरूरत या असुरक्षा (insecurity) को भी दर्शा सकता है:
  • अधूरी इच्छाएं: मुमकिन है कि बचपन में या पिछले रिश्तों में आपको वो बिना शर्त प्यार और सुरक्षा न मिली हो, जिसकी कमी को आप अब ऐसे पार्टनर के जरिए पूरा करना चाहते हैं।
  • विवादों से डर (Conflict Avoidance): कुछ लोग झगड़ों या मुश्किल बातचीत से इतना डरते हैं कि वे ऐसा पार्टनर चाहते हैं जो कभी गुस्सा न करे और हर बात पर हामी भर दे।
निष्कर्ष:
रिश्ते में वफादारी और सकारात्मकता होना बेहद जरूरी है, लेकिन सच्चे और मजबूत रिश्ते के लिए इंसान की सभी स्वाभाविक भावनाओं—जैसे गुस्सा, उदासी और कमजोरी—को भी स्वीकार करना उतना ही जरूरी है।


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