प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए फ्री ऑनलाइन कोचिंग की योजना की घोषणा की। सरकार की इस पहल का उद्देश्य देशभर के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर और सुलभ संसाधन उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही सरकार 1 करोड़ युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की ट्रेनिंग देने की योजना पर भी काम कर रही है। माना जा रहा है कि इन योजनाओं से भारत की एजुकेशन इकोनॉमी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
भारत में सरकारी नौकरी और टॉप कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए हर साल लाखों छात्र कोटा, दिल्ली और दूसरे बड़े कोचिंग हब का रुख करते हैं। इन शहरों में रहने, खाने और कोचिंग की फीस पर छात्रों और उनके परिवारों को बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है। ऐसे में फ्री ऑनलाइन कोचिंग की सुविधा शुरू होने से उन छात्रों को बड़ा फायदा मिल सकता है, जो आर्थिक कारणों या भौगोलिक दूरी की वजह से बड़े कोचिंग सेंटरों तक नहीं पहुंच पाते।
14.8 अरब डॉलर का एग्जाम-प्रेप मार्केट
भारत का टेस्ट-प्रिपरेशन मार्केट पहले ही एक बड़ा एजुकेशन सेक्टर बन चुका है। रेडसीर स्ट्रैटेजी कंसल्टेंट्स के अनुमान के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में भारत का टेस्ट-प्रिपरेशन मार्केट करीब 14.8 अरब डॉलर का हो सकता है। इसके बाद भी इस बाजार में तेजी जारी रहने की उम्मीद है। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2030 तक यह बाजार 12 से 15 फीसदी की सालाना दर से बढ़कर 23 से 26 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
ऐसे में सरकार की फ्री ऑनलाइन कोचिंग योजना इस तेजी से बढ़ते बाजार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए छात्रों को घर बैठे पढ़ाई की सुविधा मिलने पर महंगी ऑफलाइन कोचिंग पर निर्भरता कम हो सकती है। खासतौर पर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के छात्रों के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण होगा।
एलन करियर इंस्टीट्यूट प्राइवेट लिमिटेड के CEO नितिन कुकरेजा ने भी इस पहल को छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर बताया है। उनके मुताबिक, ऐसे छात्र जो घर से दूर जाकर पढ़ाई नहीं कर सकते या प्राइवेट कोचिंग की फीस वहन नहीं कर सकते, उन्हें इस योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिल सकती है।
कोचिंग सेंटर्स पर मिला-जुला असर
हालांकि फ्री ऑनलाइन कोचिंग का असर कोचिंग इंडस्ट्री पर पूरी तरह एक जैसा नहीं होगा। बड़े कोचिंग संस्थानों के लिए यह एक चुनौती बन सकती है, लेकिन दूसरी ओर ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते चलन से वे डिजिटल कोर्स, लाइव क्लास और हाइब्रिड मॉडल पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।
ऑफलाइन कोचिंग की अपनी अहमियत बनी रह सकती है, क्योंकि कई छात्र व्यक्तिगत मार्गदर्शन, टेस्ट सीरीज और शिक्षकों से सीधे संवाद को प्राथमिकता देते हैं। फिर भी सरकार की मुफ्त डिजिटल पहल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को बड़े शहरों तक सीमित रखने के बजाय देश के ज्यादा हिस्सों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
अगर योजना सही तरीके से लागू होती है और छात्रों को गुणवत्तापूर्ण कंटेंट, अनुभवी शिक्षकों तथा बेहतर टेस्टिंग सुविधाएं मिलती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत का कॉम्पिटिटिव एग्जाम प्रिपरेशन सिस्टम तेजी से डिजिटल हो सकता है। इससे छात्रों के लिए विकल्प बढ़ेंगे और कोचिंग की लागत कम करने की दिशा में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।