21 अगस्त को शुरुआती कारोबार में चीनी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। सरकार की ओर से त्योहारों के मौसम से पहले घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ाने और रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति देने के बाद शुगर स्टॉक्स पर दबाव बढ़ गया।
इस खबर का सबसे ज्यादा असर डालमिया भारत शुगर के शेयरों पर दिखाई दिया। कंपनी के शेयर शुरुआती कारोबार में 5.47 फीसदी गिरकर 480.30 रुपये पर आ गए। इसके अलावा द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज के शेयर 4.32 फीसदी की गिरावट के साथ 52.99 रुपये पर पहुंच गए।
बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयरों में भी 4.15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 735.25 रुपये पर आ गए। वहीं त्रिवेणी इंजीनियरिंग एंड इंडस्ट्रीज के शेयर 3.82 फीसदी गिरकर 288.60 रुपये पर कारोबार करते नजर आए।
इन शुगर स्टॉक्स में भी आई गिरावट
चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की खबर के बाद कई अन्य शुगर कंपनियों के शेयर भी दबाव में रहे। उत्तम शुगर मिल्स के शेयर 3.07 फीसदी गिरकर 325.90 रुपये पर आ गए। ईआईडी पैरी के शेयरों में 2.22 फीसदी की गिरावट आई और यह 792.30 रुपये पर पहुंच गए।
धामपुर शुगर मिल्स के शेयर 1.99 फीसदी गिरकर 185.99 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। वहीं अवध शुगर एंड एनर्जी के शेयरों में 1.53 फीसदी की गिरावट आई और शेयर 802.20 रुपये पर पहुंच गए।
बजाज हिंदुस्तान शुगर के शेयर 1.41 फीसदी गिरकर 23 रुपये पर आ गए, जबकि श्री रेणुका शुगर्स के शेयरों में 1.03 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 25.86 रुपये पर पहुंच गए। सिंभौली शुगर्स के शेयर 7.89 रुपये पर स्थिर रहे।
सरकार ने क्यों लिया ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट का फैसला?
सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी है। इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर नियंत्रण रखना है।
भारत में आम तौर पर चीनी के इंपोर्ट पर 100 फीसदी ड्यूटी लगाई जाती है। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में कच्ची चीनी को बिना इंपोर्ट ड्यूटी के मंगाने की अनुमति एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है। कम उत्पादन और सप्लाई में कमी के कारण पिछले दो महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक बढ़ोतरी होने की बात सामने आई है।
शुगर कंपनियों के लिए क्यों है दबाव?
ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट से घरेलू बाजार में चीनी की सप्लाई बढ़ सकती है। इससे कीमतों पर दबाव आने की संभावना है। चीनी कंपनियों के लिए ऊंची कीमतें आमतौर पर बेहतर रियलाइजेशन और मार्जिन का समर्थन करती हैं। ऐसे में कीमतों में गिरावट की आशंका से निवेशकों की धारणा कमजोर हुई और शुगर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।
त्योहारों का सीजन चीनी की मांग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान मिठाइयों, पेय पदार्थों और अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की खपत बढ़ जाती है। इसलिए सरकार ने त्योहारों से पहले बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने पर जोर दिया है।
कुल मिलाकर, ड्यूटी-फ्री चीनी इंपोर्ट का फैसला उपभोक्ताओं के लिए कीमतों को नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है, लेकिन शुगर कंपनियों के लिए यह कदम शॉर्ट टर्म में चुनौती बन सकता है। अब निवेशकों की नजर चीनी की कीमतों, घरेलू उत्पादन और आने वाले महीनों में कंपनियों के मार्जिन पर रहेगी।