एचडीएफसी बैंक ने विदेशी बॉन्ड मार्केट से 1.75 अरब डॉलर यानी करीब 17 हजार करोड़ रुपये जुटाए हैं। बैंक के लिए यह 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के बाद विदेशी बाजार से जुटाई गई सबसे बड़ी रकम है। बैंक ने यह फंड सीनियर अनसिक्योर्ड बॉन्ड जारी करके जुटाया है।
विदेशी डेट मार्केट में भारतीय बैंकों की बढ़ती सक्रियता के बीच एचडीएफसी बैंक का यह फंड जुटाना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैंक के मुताबिक, बॉन्ड जारी करने की पूरी प्रक्रिया उसकी GIFT सिटी स्थित शाखा के जरिए पूरी की गई।
यह बॉन्ड दो हिस्सों यानी डुअल-ट्रैंच में जारी किए गए हैं। पहले हिस्से में 500 मिलियन डॉलर के तीन साल की अवधि वाले बॉन्ड शामिल हैं, जबकि दूसरे हिस्से में 1.25 अरब डॉलर के पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड जारी किए गए हैं।
हर छह महीने में मिलेगा ब्याज
तीन साल की अवधि वाले बॉन्ड पर 5.159 फीसदी का कूपन तय किया गया है। वहीं पांच साल की अवधि वाले बॉन्ड पर 5.401 फीसदी का कूपन मिलेगा। दोनों बॉन्ड पर ब्याज का भुगतान हर छह महीने में किया जाएगा।
दोनों बॉन्ड का सेटलमेंट 26 अगस्त को होगा। तीन साल वाले बॉन्ड की मैच्योरिटी 26 अगस्त 2029 को होगी, जबकि पांच साल वाले बॉन्ड 26 अगस्त 2031 को मैच्योर होंगे।
तीन साल के बॉन्ड के लिए प्राइस गाइडेंस T+88 बेसिस पॉइंट्स रखा गया था, जबकि पांच साल वाले बॉन्ड के लिए यह T+100 बेसिस पॉइंट्स था।
विदेशी बाजार से फंड जुटा रहे भारतीय बैंक
एचडीएफसी बैंक का यह कदम ऐसे समय में आया है जब कई भारतीय प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर बैंक विदेशी डेट मार्केट का इस्तेमाल करके पूंजी जुटा रहे हैं। विदेशी बाजार से फंड जुटाने से बैंकों को अपनी फंडिंग जरूरतों को पूरा करने और कारोबार के विस्तार के लिए अतिरिक्त पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
बैंकों के लिए विदेशी बॉन्ड बाजार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे उन्हें घरेलू बाजार के अलावा अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से सीधे फंड जुटाने का विकल्प मिलता है। इससे उनकी फंडिंग के स्रोतों में विविधता आती है।
RBI की स्वैप विंडो से भी मिल रहा समर्थन
हाल के दिनों में भारतीय बैंकों की विदेशी फंडिंग गतिविधियों को रिजर्व बैंक की एक्सटर्नल कमर्शियल बॉरोइंग यानी ECB व्यवस्था के तहत उपलब्ध कंसेशनल स्वैप विंडो से भी समर्थन मिला है। यह विशेष व्यवस्था साल के अंत तक जारी रहने वाली है।
ऐसे माहौल में एचडीएफसी बैंक का 1.75 अरब डॉलर का बॉन्ड इश्यू विदेशी निवेशकों के भारतीय बैंकिंग सेक्टर में भरोसे को भी दर्शाता है। बैंक के लिए इतनी बड़ी रकम जुटाना उसकी मजबूत बाजार स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फंडिंग तक पहुंच को दिखाता है।
कुल मिलाकर, एचडीएफसी बैंक का यह बॉन्ड इश्यू भारतीय बैंकिंग सेक्टर के लिए एक अहम घटनाक्रम है। 2008 के बाद सबसे बड़ा विदेशी फंड जुटाने के साथ बैंक ने अंतरराष्ट्रीय डेट मार्केट में अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है।