श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान-चढ़ावे में हुई अनियमितताओं और चोरी के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश शासन के माध्यम से श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। इस अंतिम रिपोर्ट में पूर्व महामंत्री चंपत राय और ट्रस्ट के पूर्व सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को बड़ी राहत मिली है; जांच टीम ने दोनों प्रमुख पदाधिकारियों को क्लीन चिट दे दी है। गौरतलब है कि प्राथमिक जांच के दौरान उठे विवादों के बीच दोनों पदाधिकारियों ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। एसआईटी की गहन जांच-पड़ताल और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया है कि चढ़ावे के प्रबंधन में हुई हेराफेरी में उनकी कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं थी।
यह जांच मामला 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित तीन सदस्यीय एसआईटी द्वारा संचालित किया गया था, जिसकी कमान लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के पास थी। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को श्रीराम जन्मभूमि थाने में प्राथमिकी (FIR संख्या 90/2026) दर्ज की गई थी, जिसमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा सहित आठ नामजद और अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया था। आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत मामला दर्ज हुआ था। अब शासन द्वारा फाइनल रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपे जाने के बाद आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा-प्रबंधन के कड़े दिशानिर्देशों पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।