टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के दोबारा चेयरमैन पद पर नियुक्ति नहीं लेने के फैसले का असर बुधवार को टाटा ग्रुप की कई लिस्टेड कंपनियों के शेयरों पर साफ दिखाई दिया। चंद्रशेखरन ने कहा कि उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। इस खबर के बाद निवेशकों के बीच टाटा ग्रुप के भविष्य के नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ी और कई टाटा शेयरों में तेज बिकवाली देखने को मिली।
बाजार में आई इस गिरावट का असर केवल एक-दो कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। टाटा ग्रुप की 17 लिस्टेड कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैपिटलाइजेशन बुधवार को करीब 68,119 करोड़ रुपये घटकर लगभग 26.32 लाख करोड़ रुपये रह गया। एक दिन पहले यह करीब 27 लाख करोड़ रुपये था।
TCS में सबसे ज्यादा दबाव
टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शामिल TCS के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। BSE पर TCS का शेयर एक समय करीब 5.70 फीसदी तक गिर गया। इसके अलावा Tata Motors Passenger Vehicles, Tata Consumer Products, Tata Elxsi, Tata Communications, Tata Steel और Titan समेत कई शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, Tata Motors Passenger Vehicles के शेयर में करीब 4.11 फीसदी, Tata Consumer Products में 2.85 फीसदी, Tata Elxsi में 2.14 फीसदी, Tata Communications में करीब 2 फीसदी, Tata Steel में 1.96 फीसदी और Titan में 1.66 फीसदी की गिरावट आई। Tata Power, Indian Hotels और Trent के शेयर भी दबाव में रहे।
हालांकि, अलग-अलग बाजार सत्रों और एक्सचेंजों के आधार पर शेयरों की गिरावट के आंकड़ों में अंतर देखा गया। इसलिए इंट्राडे और क्लोजिंग आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
आखिर क्यों घबराए निवेशक?
निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण टाटा संस के नेतृत्व को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता है। चंद्रशेखरन ने अपने बयान में कहा कि टाटा संस कई महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं के महत्वपूर्ण चरण में है और ऐसे समय में कर्मचारियों, निवेशकों, साझेदारों और अन्य हितधारकों के लिए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता जरूरी है। उन्होंने बोर्ड से जल्द उत्तराधिकारी तय करने को कहा है।
रिपोर्टों के मुताबिक, उनके अगले कार्यकाल को लेकर फरवरी 2026 में टाटा संस बोर्ड की बैठक में चर्चा हुई थी, लेकिन प्रस्ताव को सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिल सका। इसके बाद कई महीनों तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। अब चंद्रशेखरन ने खुद 2027 में कार्यकाल समाप्त होने के बाद दोबारा नियुक्ति नहीं लेने का फैसला किया है।
टाटा ग्रुप के लिए बड़ा नेतृत्व परिवर्तन
एन. चंद्रशेखरन 2017 में टाटा संस के चेयरमैन बने थे और उनके नेतृत्व में समूह ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल और एविएशन जैसे क्षेत्रों में विस्तार किया। टाटा ग्रुप ने एयर इंडिया को दोबारा अपने समूह में शामिल करने जैसी बड़ी रणनीतिक पहल भी उनके कार्यकाल में की।
बाजार विशेषज्ञों के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि चंद्रशेखरन के बाद टाटा संस की कमान किसे मिलेगी। हालांकि टाटा ग्रुप की अधिकांश लिस्टेड कंपनियां अलग-अलग प्रबंधन टीमों द्वारा संचालित होती हैं, लेकिन टाटा संस के नेतृत्व में बदलाव से समूह की रणनीति, पूंजी आवंटन और भविष्य की बड़ी परियोजनाओं को लेकर निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है।
मार्केट कैप में बड़ी गिरावट
चंद्रशेखरन के फैसले के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों में हुई बिकवाली ने एक ही कारोबारी सत्र में करीब 68,119 करोड़ रुपये की बाजार पूंजी को कम कर दिया। यह गिरावट ऐसे समय आई जब व्यापक शेयर बाजार भी दबाव में था। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर बाजार धारणा ने भी इक्विटी मार्केट पर दबाव बढ़ाया।
आने वाले महीनों में निवेशकों की नजर अब टाटा संस के उत्तराधिकारी चयन की प्रक्रिया पर रहेगी। नया नेतृत्व किस दिशा में समूह को आगे ले जाता है किस तरह आगे बढ़ाया जाता है, यह टाटा ग्रुप के शेयरों के लिए महत्वपूर्ण कारक हो सकता है।