केन्द्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन पुनरीक्षण के लिए गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) का परामर्श चक्र अब एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में 3 नवंबर 2025 को गठित इस तीन-सदस्यीय आयोग ने नई दिल्ली में कर्मचारी संघों, ट्रेड यूनियनों और पेंशनभोगी एसोसिएशनों के साथ 7 से 10 अगस्त 2026 के बीच परामर्श दौर संपन्न किया है। दिल्ली की इन महत्वपूर्ण चर्चाओं के बाद अब आयोग आगामी हफ्तों में देश के विभिन्न राज्यों का रुख करेगा, जिसमें चेन्नई, पुडुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर जैसे प्रमुख केंद्र शामिल हैं, ताकि क्षेत्रीय स्तर पर केंद्रीय कर्मचारियों की मांगों को समझा जा सके।
नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और विभिन्न रेलवे व रक्षा कर्मचारी संगठनों ने आयोग के समक्ष अपना मांग-पत्र सौंपा है। यूनियनों का मुख्य जोर 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने पर है, जिससे न्यूनतम मूल वेतन (Basic Pay) वर्तमान ₹18,000 से बढ़कर ₹69,000 प्रति माह हो जाए। इसके अलावा वार्षिक वेतन वृद्धि (Annual Increment Rate) को मौजूदा 3% से बढ़ाकर 5% या 6% करने की मांग रखी गई है, जिससे कर्मचारियों की करियर प्रगति तेज हो सके। पेंशनर्स एसोसिएशनों ने भी पूर्ण पेंशन को अंतिम आहरित वेतन (Last Drawn Salary) का 67% करने और वरिष्ठ पेंशनभोगियों के लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को बढ़ाकर ₹3,000 करने का प्रस्ताव दिया है।
मई-जून 2027 में अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे इस आयोग के समक्ष महंगाई भत्ते (DA) के समायोजन, एक्स, वाई और जेड श्रेणी के शहरों के लिए मकान किराया भत्ते (HRA) के पुनर्गठन और भत्तों के सरलीकरण जैसे अहम मुद्दे हैं। यद्यपि आयोग ने अभी आधिकारिक सिफारिशें जारी नहीं की हैं, लेकिन उम्मीद है कि सरकार द्वारा मंजूरी के पश्चात नया वेतन ढांचा 1 जनवरी 2026 की तिथि से भूतलक्षी (Retrospective) प्रभाव से लागू किया जाएगा।