देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच बढ़ाने तथा ग्रामीण सहकारी बैंकों (RCBs) की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए नियमों का एक व्यापक मसौदा (Draft Framework) पेश किया है। अगस्त 2026 में जारी इस ड्राफ्ट के तहत केंद्रीय बैंक ने ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए जोखिम प्रबंधन (Risk Management) नियमों को सख्त करने के साथ-साथ होम लोन आवंटन की सीमाओं को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इन नए दिशा-निर्देशों के लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में ऋण वितरण अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हो जाएगा।
आरबीआई के मसौदे के अनुसार, ग्रामीण सहकारी बैंकों की जमा राशि (Deposits) के आधार पर व्यक्तिगत आवास ऋण (Individual Housing Loan) की ऊपरी सीमा में महत्वपूर्ण वृद्धि की गई है। ₹10,000 करोड़ से अधिक की जमा वाले बड़े सहकारी बैंक अब प्रति व्यक्ति ₹3 करोड़ तक का होम लोन स्वीकृत कर सकेंगे, जबकि छोटे बैंकों के लिए यह सीमा जमा आकार के अनुसार ₹60 लाख से ₹2 करोड़ तक तय की गई है। इसके अतिरिक्त, ₹1,000 करोड़ से अधिक जमा वाले बैंकों को बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीतियों के तहत ऋण की समय-सीमा और मोरेटोरियम अवधि स्वयं निर्धारित करने की परिचालन स्वतंत्रता दी गई है।
वित्तीय धोखाधड़ी और एनपीए (NPA) के जोखिम को रोकने के लिए आरबीआई ने 'कंसंट्रेशन रिस्क' (Concentration Risk) नियम लागू किए हैं। इसके तहत कोई भी ग्रामीण सहकारी बैंक किसी एक व्यक्ति या संस्था को अपनी टियर-1 कैपिटल का अधिकतम 20% और किसी एक कॉर्पोरेट समूह को अधिकतम 25% ही लोन दे सकेगा। रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए कुल अग्रिमों की सीमा 15% पर सीमित की गई है। हितधारकों से 28 अगस्त 2026 तक सुझाव मांगे गए हैं और अंतिम नियम 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होने की संभावना है।