नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी विमान ईंधन में इथेनॉल मिलाने की योजना संबंधी सभी रिपोर्टों और सोशल मीडिया दावों का पूरी तरह से खंडन किया है। नागरिक उड्डयन मंत्री के. राममोहन नायडू ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि सरकार के पास विमान ईंधन में इथेनॉल ब्लेंडिंग का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है और इस तरह की खबरें "पूर्णतः झूठी एवं गैर-जिम्मेदाराना" हैं। उन्होंने कहा कि विमानन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गलत अफवाहें फैलाने से हवाई यात्रियों के बीच बेवजह डर और अनिश्चितता का माहौल पैदा होता है।
केंद्रीय मंत्री ने तकनीकी अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि सड़क परिवहन में इस्तेमाल होने वाले इथेनॉल और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत 'सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल' (SAF) दो बिल्कुल अलग-अलग ईंधन हैं। जहां मोटर वाहनों के लिए पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जाता है, वहीं हवाई जहाजों के लिए उपयोग होने वाला SAF कृषि अवशेषों, प्रयुक्त खाद्य तेल और अवशिष्ट पदार्थों से निर्मित एक वैश्विक रूप से प्रमाणित नवीकरणीय विकल्प है। अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के कड़े सुरक्षा मानकों के तहत SAF का गहन परीक्षण किया जाता है, जिसके बाद ही इसे जेट ईंधन में सीमित अनुपात में मिलाने की अनुमति मिलती है।
सड़क वाहनों के लिए E20 पेट्रोल के क्रियान्वयन के बीच कुछ राजनीतिक नेताओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर दावा किया जा रहा था कि सरकार विमान ईंधन में भी इथेनॉल मिला सकती है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने इन सभी अटकलों को खारिज करते हुए दोहराया है कि यात्रियों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। वैश्विक प्रतिबद्धताओं के तहत भारत केवल सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल के चरणबद्ध उपयोग की दिशा में काम कर रहा है, न कि इथेनॉल के मिश्रण पर।