संसद में हाल ही में पारित हुए टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 के बाद सोशल मीडिया पर डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त शुल्क लगने की अफवाहें तेजी से फैल रही थीं। हालांकि, पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म फोनपे (PhonePe) के सीईओ समीर निगम ने इन अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई (UPI) लेनदेन पूरी तरह से निशुल्क था, है और आगे भी रहेगा।
समीर निगम ने बताया कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को किए जाने वाले पैसे के ट्रांसफर और सामान्य किराना दुकानों या छोटे व्यापारियों को किए जाने वाले भुगतान पर ग्राहकों या छोटे दुकानदारों से कोई मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या अतिरिक्त चार्ज नहीं वसूला जाएगा। नए टैक्स संशोधन कानून का उद्देश्य आम जनता पर बोझ डालना नहीं, बल्कि बड़े व्यावसायिक और बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) लेनदेन के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र को विनियमित करना है।
संशोधित नियमों के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के बड़े कमर्शियल और B2B यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक का एमडीआर लागू करने का प्रावधान सरकार के पास है। यह शुल्क बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं के तकनीकी बुनियादी ढांचे के रखरखाव के लिए केवल बड़े कॉरपोरेट और मर्चेंट संस्थाओं पर लागू होगा। साधारण उपभोक्ता और दैनिक उपयोग की खरीदारी करने वाले नागरिक बिना किसी हिचकिचाहट के डिजिटल भुगतान का उपयोग जारी रख सकते हैं।