अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में पिछले पांच दिनों से जारी कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बढ़ोतरी का दौर थम गया है। 13 अगस्त 2026 को वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड दोनों के भाव में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। ओपेक (OPEC) और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) द्वारा 2026 के लिए वैश्विक तेल मांग के अनुमानों में कटौती तथा अमेरिका-ईरान तनाव के बीच कूटनीतिक वार्ताओं की खबरों ने बाजार में इस नरमी को बढ़ावा दिया है।
वायदा बाजार में कारोबार के दौरान ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 1.01% गिरकर 88.08 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि WTI क्रूड 1.15% फिसलकर 82.30 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में वाणिज्यिक कच्चे तेल के भंडार (Inventories) में हुई अप्रत्याशित वृद्धि और वैश्विक मांग में सुस्ती के अनुमानों ने कीमतों पर दबाव बनाया है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और मध्य पूर्व में जारी रणनीतिक गतिरोध के कारण आपूर्ति जोखिम अब भी बने हुए हैं।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में आई इस नरमी के बावजूद भारतीय घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने दिल्ली, मुंबई और अन्य प्रमुख महानगरों में कीमतें यथावत रखी हैं। पेट्रोलियम विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय दरों में हुई तेजी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला था, इसलिए हालिया हल्की गिरावट के बाद तुरंत खुदरा कीमतों में कटौती की संभावना कम है।