सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द किया समन?
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे में यह सामने आया कि अभियोजन के लिए जरूरी सेंशन दिए जाने का कोई उल्लेख नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी कानूनी कमी को आधार बनाते हुए निचली अदालत के आदेश और राहुल गांधी के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को रद्द कर दिया।
2022 के भारत जोड़ो यात्रा से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला नवंबर 2022 में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान महाराष्ट्र के अकोला में दिए गए एक भाषण से जुड़ा है। राहुल गांधी ने भाषण के दौरान वीर सावरकर को लेकर टिप्पणी की थी, जिस पर विवाद खड़ा हुआ था।
इसके बाद अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दाखिल की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनकी टिप्पणी से सावरकर की छवि को नुकसान पहुंचा और समाज में वैमनस्य पैदा करने की कोशिश की गई।
किन धाराओं में हुई थी कार्रवाई?
मामले में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 153A और 505 के तहत कार्रवाई की गई थी। धारा 153A अलग-अलग समूहों के बीच वैमनस्य बढ़ाने से संबंधित है, जबकि धारा 505 सार्वजनिक शांति और व्यवस्था को प्रभावित करने वाले बयानों से जुड़ी है।
निचली अदालत ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी को समन जारी किया था। इसके बाद उन्होंने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट से नहीं मिली थी राहत
राहुल गांधी ने निचली अदालत के समन को चुनौती दी थी, लेकिन अप्रैल 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में इस शिकायत से जुड़ी आपराधिक कार्यवाही और समन खत्म हो गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या मतलब है?
सुप्रीम कोर्ट का फैसला मुख्य रूप से अभियोजन के लिए जरूरी कानूनी सेंशन की कमी पर आधारित है। यानी अदालत ने इस स्तर पर सावरकर को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणी सही या गलत होने पर कोई फैसला नहीं दिया है।
अदालत ने जरूरी कानूनी मंजूरी नहीं होने के कारण ही शिकायत और निचली अदालत के आदेश को रद्द किया है।