बेंगलुरु। देश में धन शोधन, आतंकवाद के वित्तपोषण और सीमा पार होने वाले वित्तीय अपराधों के बढ़ते जोखिम के बीच राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ सुनील कवीश्वर ने एक विशेष प्रशिक्षित वित्तीय-सुरक्षा कार्यबल तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों को आधुनिक आर्थिक अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए पारंपरिक विशेषज्ञता के साथ नई तकनीकों की समझ रखने वाले पेशेवरों की भी जरूरत है।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के आपराधिक विधि एवं सैन्य विधि संकाय के निदेशक कवीश्वर ने बताया कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय ने वित्तीय एवं आर्थिक सुरक्षा में स्नातकोत्तर कार्यक्रम शुरू किया है। एमएफईएस नामक यह एक वर्षीय पूर्णकालिक पाठ्यक्रम वित्तीय अपराध अनुपालन, जोखिम प्रबंधन और आर्थिक सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ तैयार करने पर केंद्रित है।
उन्होंने बताया कि अगले बैच में करीब 60 विद्यार्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। कुछ विदेशी प्रतिभागियों के भी कार्यक्रम का हिस्सा बनने की संभावना है। पाठ्यक्रम की फीस तीन लाख रुपये निर्धारित की गई है। कार्यक्रम का उद्देश्य वित्तीय सुरक्षा से जुड़े नियमों और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने वाले प्रशिक्षित मानव संसाधन के बीच मौजूद अंतर को कम करना है।
कवीश्वर के अनुसार, पाठ्यक्रम में मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवादी वित्तपोषण, रिश्वतखोरी, भ्रष्टाचार और अवैध तस्करी से जुड़े वित्तीय लेनदेन की पहचान तथा रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विद्यार्थियों को भारतीय कानूनों के साथ संयुक्त राष्ट्र, एफएटीएफ और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के संबंधित ढांचे की जानकारी भी दी जाएगी।
कार्यक्रम में फॉरेंसिक जांच, वित्तीय लेखांकन, धोखाधड़ी की पहचान, साइबर जोखिम, केवाईसी, नियामकीय अनुपालन और वित्तीय खुफिया जैसे विषय शामिल हैं। इसके अलावा क्रिप्टोकरेंसी, वर्चुअल एसेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और नई भुगतान प्रणालियों से जुड़े जोखिमों को भी पाठ्यक्रम में जगह दी गई है।
कवीश्वर ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसा मानव संसाधन तैयार करना है जो बैंक, वित्तीय संस्थान, नियामक और कारोबारी संगठनों को बदलते वित्तीय अपराधों से निपटने में मदद कर सके। पाठ्यक्रम में सैद्धांतिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन को भी शामिल किया गया है।