भारत में बौद्ध पर्यटन के नक्शे पर सारनाथ और बोधगया सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं, लेकिन उत्तर भारत में ऐसे कई ऐतिहासिक और शांत स्थल भी मौजूद हैं जो प्राचीन बौद्ध इतिहास, आध्यात्म और समृद्ध संस्कृति को समेटे हुए हैं। भीड़भाड़ से दूर शांति और इतिहास की तलाश करने वाले पर्यटकों के लिए ये 5 बौद्ध स्थल बेहद खास हैं:
1. कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)
पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्थित कुशीनगर बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है। यह वही स्थान है जहां भगवान बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था।
प्रमुख आकर्षण: महापरिनिर्वाण मंदिर (जहां बुद्ध की शयन मुद्रा वाली प्रतिमा स्थित है) और रामाभार स्तूप (बुद्ध का अंतिम संस्कार स्थल)। यहाँ थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका और जापान द्वारा बनाए गए कई सुंदर बौद्ध मंदिर भी हैं।
2. संकिसा (उत्तर प्रदेश)
फर्रुखाबाद जिले में स्थित संकिसा एक शांत और महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है। बौद्ध मान्यताओं के अनुसार, भगवान बुद्ध स्वर्ग (त्रायस्त्रिंश) में अपनी माता को उपदेश देने के बाद यहीं पृथ्वी पर अवतरित हुए थे।
प्रमुख आकर्षण: सम्राट अशोक के काल का प्रसिद्ध हाथी शीर्ष (Elephant Capital) और प्राचीन टीले।
3. ताबो मठ, स्पीति घाटी (हिमाचल प्रदेश)
हिमाचल प्रदेश की सुरम्य स्पीति घाटी में 996 ईस्वी में स्थापित ताबो मठ भारत के सबसे पुराने लगातार संचालित होने वाले बौद्ध मठों में से एक है।
प्रमुख आकर्षण: अपनी प्राचीन भित्तिचित्रों (murals), मूर्तियों और भारत-तिब्बती कला शैली के लिए प्रसिद्ध इस मठ को 'हिमालय का अजंता' भी कहा जाता है।
4. हैप्पी वैली, मसूरी (उत्तराखंड)
मसूरी के मॉल रोड की भीड़भाड़ से दूर हैप्पी वैली तिब्बती बौद्ध संस्कृति का केंद्र है।
प्रमुख आकर्षण: शेडुप चोएपेलिंग मंदिर (तिब्बती बौद्ध मंदिर), जहां रंग-बिरंगे प्रार्थना ध्वज (prayer flags), सुंदर भित्तिचित्र और प्रेयर व्हील्स पर्यटकों को शांति और सुकून का अहसास कराते हैं।
5. संजौली, शिमला (हिमाचल प्रदेश)
शिमला के प्रसिद्ध रिज और मॉल रोड से अलग, संजौली क्षेत्र में तिब्बती बौद्ध प्रभाव की गहरी झलक देखने को मिलती है।
प्रमुख आकर्षण: दोरजे द्राक मठ (Dorje Drak Monastery), जो तिब्बती बौद्ध धर्म की न्यिंगमा परंपरा से संबंधित है। अपनी विशिष्ट वास्तुकला और शांत वातावरण के लिए यह स्थल जाना जाता है।