हिंदी सिनेमा की कुछ फिल्में समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि हर गुजरते साल के साथ और भी खास बन जाती हैं। विशाल भारद्वाज की'ओमकारा' ऐसी ही फिल्मों में शामिल है। फिल्म की रिलीज़ के 20 साल पूरे होने पर सोनी म्यूजिक इंडिया ने इसके यादगार साउंडट्रैक को खासअंदाज़ में याद किया। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में फिल्म के बेहतरीन दृश्यों के साथ उसके अमर गीतों को श्रद्धांजलि दी गई।पोस्ट के कैप्शन में लिखा गया, "आप सिर्फ़ एक पसंदीदा गाना नहीं चुन सकते," और यही बात इस एल्बम की सबसे बड़ी पहचान भी है।
साल 2006 में रिलीज़ हुई 'ओमकारा' का संगीत आज भी उतना ही ताज़ा महसूस होता है जितना दो दशक पहले था। विशाल भारद्वाज के संगीत औरगुलज़ार के बोलों ने मिलकर ऐसा जादू रचा, जिसने हर गाने को एक अलग पहचान दी। 'बीड़ी जलाई ले', 'नैना ठग लेंगे', 'ओ साथी रे', 'नमक' औरफिल्म का टाइटल ट्रैक आज भी संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट का अहम हिस्सा हैं। लोक संगीत की खुशबू, भावनाओं की गहराई और कहानी के साथइन गीतों का मेल इस एल्बम को हिंदी सिनेमा के सबसे बेहतरीन साउंडट्रैक्स में शामिल करता है।
28 जुलाई 2006 को रिलीज़ हुई 'ओमकारा' विलियम शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक 'ओथेलो' से प्रेरित थी, जिसे विशाल भारद्वाज ने उत्तर प्रदेश कीराजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि में बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश किया। फिल्म में अजय देवगन, करीना कपूर, सैफ अली खान, कोंकणा सेन शर्मा, विवेक ओबेरॉय और बिपाशा बसु जैसे सितारों ने अपने शानदार अभिनय से कहानी को जीवंत बना दिया। खास तौर पर सैफ अली खान का 'लंगड़ात्यागी' आज भी उनके करियर के सबसे यादगार किरदारों में गिना जाता है।
रिलीज़ के समय 'ओमकारा' को निर्देशन, संवाद, अभिनय और संगीत के लिए जबरदस्त सराहना मिली थी। फिल्म ने तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार अपनेनाम किए और 52वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में 19 नामांकन हासिल कर नौ पुरस्कार जीते। इसके अलावा, फिल्म को कान्स फिल्म फेस्टिवल के मार्शे डूफ़िल्म सेक्शन और काहिरा इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी सराहा गया। इन उपलब्धियों ने 'ओमकारा' को भारतीय सिनेमा कीबेहतरीन साहित्यिक रूपांतरण फिल्मों में स्थायी स्थान दिलाया।
बीस साल बाद भी 'ओमकारा' सिर्फ़ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की एक मिसाल मानी जाती है। इसकी कहानी, किरदार और संगीत आजभी नई पीढ़ी के दर्शकों और फिल्म निर्माताओं को प्रेरित करते हैं। सोनी म्यूजिक इंडिया का यह खास ट्रिब्यूट एक बार फिर याद दिलाता है कि कुछएल्बम ऐसे होते हैं जिनमें सिर्फ़ एक पसंदीदा गाना चुनना नामुमकिन होता है। यही वजह है कि 'ओमकारा' का संगीत और उसकी विरासत आज भीउतनी ही ज़िंदा है, जितनी 20 साल पहले थी।
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