केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के संसद में दिए बयान पर पलटवार किया है। प्रियंका गांधी ने छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया था कि प्रदर्शन कर रहे छात्र क्या आतंकवादी थे, जो उन पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया।
किशन रेड्डी ने इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड का जिक्र किया और कहा कि किसी भी कार्रवाई पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने इतिहास पर भी जवाब देना चाहिए।
तेलंगाना आंदोलन का किया जिक्र
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रियंका गांधी ने दिल्ली में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए, लेकिन कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि तेलंगाना आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ क्या हुआ था।
उन्होंने कहा कि 1969 के अलग तेलंगाना आंदोलन के पहले चरण में पुलिस फायरिंग में 369 छात्रों की मौत हुई थी। रेड्डी ने सवाल किया कि क्या उस समय कांग्रेस सरकार उन छात्रों को आतंकवादी मानती थी?
उन्होंने तेलंगाना आंदोलन के दूसरे चरण का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियों, देरी और कथित विश्वासघात के कारण करीब 1,200 छात्रों और युवाओं की जान गई।
यादी रेड्डी समेत आंदोलनकारियों का किया जिक्र
किशन रेड्डी ने कहा कि कई छात्रों ने अलग तेलंगाना राज्य की मांग के लिए बड़ी कुर्बानी दी। उन्होंने यादी रेड्डी का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे युवाओं के संघर्ष को कांग्रेस ने नजरअंदाज किया।
उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस की नजर में लोकतांत्रिक मांगों के लिए आंदोलन करने वाले वे छात्र भी आतंकवादी थे?
इमरजेंसी का मुद्दा उठाया
केंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में 1975 की इमरजेंसी का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए आवाज उठाने वाले हजारों छात्रों को जेल में डाला और असहमति की आवाजों को दबाया।
रेड्डी ने कहा कि कांग्रेस को अपने अतीत के उन अध्यायों पर भी चर्चा करनी चाहिए, जब छात्रों और विरोध करने वालों पर कार्रवाई हुई थी।
प्रियंका गांधी के बयान पर सियासी घमासान
छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज हो गई है। विपक्ष सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार विपक्ष को पुराने मामलों की याद दिलाकर जवाब दे रही है।
इस मुद्दे पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी जारी है।