अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को 'लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध कानून 2026' पर अपने हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके साथ ही यह विधेयक आधिकारिक रूप से कानून बन गया है। इस नए कानून के तहत वाशिंगटन को रूस से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का भारी आयात करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक का दंडात्मक शुल्क (टैरिफ) लगाने का व्यापक वैधानिक अधिकार मिल गया है। इस कदम का सीधा उद्देश्य मास्को के ऊर्जा राजस्व को तोड़कर उसे यूक्रेन युद्ध समाप्त करने के लिए वार्ता की टेबल पर लाना है। साउथ कैरोलिना के दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा तैयार किए गए इस प्रस्ताव में रूसी ऊर्जा क्षेत्र, 'शैडो फ्लीट' के जहाजों, बैंकों और शीर्ष अधिकारियों पर भी नए प्रतिबंधों का प्रावधान है।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा और सीनेट में भारी बहुमत से पारित यह कानून लागू होने के बाद भारत और चीन जैसे प्रमुख रूसी तेल खरीदारों पर सीधा आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। यद्यपि कानून के तहत टैरिफ का उपयोग राष्ट्रपति ट्रंप के विशेषाधिकार पर निर्भर करेगा, किंतु यदि भारत पर 100% शुल्क लगाया जाता है, तो अमेरिका भेजे जाने वाले भारतीय वस्त्र, रत्न-आभूषण, आईटी, और फार्मास्युटिकल्स उत्पाद बेहद महंगे हो जाएंगे। इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान होगा ही, साथ ही अमेरिकी उपभोक्ताओं को भी महंगाई का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर, भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाना जारी रखेगा।