संसद में ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पहले छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश की और अब राजनीतिक दबाव के बीच यह विधेयक लेकर आई है।
शशि थरूर ने लोकसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि सरकार इससे पहले भी परीक्षा में गड़बड़ी रोकने के लिए कानून और प्रावधानों की बात कर चुकी है। अब फिर से कमेटी बनाने और फास्ट ट्रैक कोर्ट जैसी व्यवस्थाओं का जिक्र किया जा रहा है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट और CBI को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई हो रही थी, तब सरकार CBI के वकील तक उपलब्ध नहीं करा सकी।
उन्होंने कहा कि देश में पहले से चल रहे फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। थरूर ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नई घोषणाओं को ऐसे पेश कर रही है जैसे यह पहली बार किया जा रहा हो।
‘युवाओं ने दिखाया कि वे जागरूक हैं’
शशि थरूर ने युवाओं के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि छात्रों ने लोकतंत्र में अपनी भूमिका दिखाई है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के हाथों में संविधान था और वे अपने अधिकारों की आवाज उठा रहे थे।
उन्होंने कहा कि युवाओं ने यह संदेश दिया कि लोकतंत्र में असली शक्ति जनता के पास होती है।
शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली पर सरकार को घेरा
कांग्रेस सांसद ने कहा कि जब देश का भविष्य सड़कों पर उतरा, तो उसने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की कमियों को उजागर किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्षों में परीक्षा व्यवस्था में कई खामियां सामने आईं और सरकार ने छात्रों के साथ जिस तरह व्यवहार किया, वह उचित नहीं था।
थरूर ने कहा कि सरकार को छात्रों से बातचीत करनी चाहिए थी और उनकी समस्याओं को समझना चाहिए था, न कि सख्ती का रास्ता अपनाना चाहिए।
सरकार देगी विपक्ष के आरोपों का जवाब
लोकसभा में विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर सरकार मंगलवार को जवाब देने की तैयारी में है। सरकार का कहना है कि नया संशोधन विधेयक परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने, अनुचित साधनों पर रोक लगाने और छात्रों के हितों की रक्षा करने के उद्देश्य से लाया गया है।
परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के बढ़ते मामलों के बीच यह विधेयक संसद में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है।