महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद (MSCE) ने कल 28 जून 2026 को आयोजित होने वाली महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के सफल और पारदर्शी संचालन के लिए कड़े प्रशासनिक एवं विखंडनकारी विनियामक दिशानिर्देश जारी किए हैं। परिषद ने महिला उम्मीदवारों की विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए कूटनीतिक रूप से साफ किया है कि उन्हें परीक्षा केंद्रों पर हिजाब, बुर्का, ओढ़नी या पारंपरिक दुपट्टा पहनकर आने की पूर्ण विलेख आजादी होगी। हालांकि, परीक्षा की शुचिता बनाए रखने और सुरक्षा लॉजिस्टिक्स को पुख्ता करने के लिए बोर्ड ने एक कड़ा प्रतिबंध लगाया है, जिसके तहत परीक्षा हॉल (क्लासरूम) के भीतर गर्दन से ऊपर का कोई भी हिस्सा यानी चेहरा, मुंह, सिर या कान किसी भी कपड़े या मास्क से ढके नहीं होने चाहिए।
परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, पूर्व में जारी कड़े निर्देशों में हिजाब और बुर्के पर पूर्ण प्रतिबंध की बात कही गई थी, जिसका महिला अभ्यर्थियों ने विधिक विरोध करते हुए रियायत देने की कड़ा मांग की थी। चूंकि परीक्षा केंद्रों पर लाइव सीसीटीवी (CCTV) सर्विलांस और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की विखंडनकारी व्यवस्था लागू है, इसलिए परीक्षा के दौरान हर उम्मीदवार का चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई देना विधिक रूप से अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त, परीक्षा कक्ष के भीतर अनुचित साधनों और तकनीकी गैजेट्स के दुरुपयोग को कड़ाई से रोकने के लिए जूते पहनने पर पूर्ण पाबंदी लगाई गई है; अभ्यर्थियों को केवल साधारण चप्पल, सैंडल या हल्के फुटवियर पहनने की ही विलेख अनुमति दी जाएगी।
इस कड़े राज्य स्तरीय चयन ढांचे के तहत मूल्यांकन पद्धति को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए हैं। प्रत्येक बहुविकल्पीय प्रश्न का केवल एक ही विकल्प सही माना जाएगा और यदि किसी उम्मीदवार ने एक बार अपना उत्तर चुन लिया, तो उसे बाद में बदला या संशोधित नहीं किया जा सकेगा। किसी भी प्रकार के ओवरराइटिंग या दोहरे विकल्पों वाले उत्तरों पर कोई विधिक अंक नहीं दिए जाएंगे। एमएससीई ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या विखंडनकारी गड़बड़ी से निपटने के लिए जिला प्रशासन और सुरक्षा बलों के साथ कूटनीतिक लॉजिस्टिक्स पूरी तरह तैयार है, ताकि योग्य और कड़े मानदंडों पर खरे उतरने वाले अभ्यर्थियों का चयन विलेख रूप से सुनिश्चित किया जा सके।