अक्सर सुबह अलार्म बजते ही या आंख खुलते ही बहुत से लोग झटके के साथ बिस्तर से उठ जाते हैं और अपने काम में लग जाते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो सावधान हो जाइए। रीढ़ की हड्डी के विशेषज्ञों (Spine Experts) ने चेतावनी दी है कि सुबह का यह 'झटका' आपकी पीठ और रीढ़ की हड्डी (Spine) को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
एन्डोस्कोपिक न्यूरो-स्पाइन सर्जन डॉ. चंद्रतेज कदम ने सोशल मीडिया पर इस संबंध में जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि रातभर सोने के बाद हमारी रीढ़ की हड्डी स्वाभाविक रूप से काफी सख्त (Stiff) हो जाती है। ऐसे में अचानक तेजी से उठने पर रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद डिस्क्स (Spinal Discs) पर अनावश्यक और अत्यधिक दबाव पड़ता है।
रात में रीढ़ की हड्डी में क्या बदलाव होते हैं?
एशियन हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी विभाग के निदेशक और एचओडी डॉ. मुकेश पांडे ने इसके पीछे के वैज्ञानिक कारण को समझाया है। उन्होंने बताया कि जब हम रात में कई घंटों तक लेटे रहते हैं, तो हमारी रीढ़ की हड्डी के बीच शॉक-अब्जॉर्बर का काम करने वाली डिस्क्स 'रीहाइड्रेशन' (तरल पदार्थ को सोखने) की प्रक्रिया से गुजरती हैं।
दिनभर गुरुत्वाकर्षण और शरीर के वजन के कारण ये डिस्क्स संकुचित रहती हैं, लेकिन रात में सोते समय दबाव कम होने से ये पानी सोखकर थोड़ी मोटी हो जाती हैं। यही वजह है कि सुबह के समय इंसान की लंबाई रात के मुकाबले थोड़ी सी ज्यादा होती है।
इस प्रक्रिया के कारण सुबह सोकर उठने के तुरंत बाद इन डिस्क्स के अंदर का दबाव (Intradiscal Pressure) काफी अधिक होता है और वे कम लचीली होती हैं। इसके साथ ही, रातभर पीठ की मांसपेशियां और जोड़ भी निष्क्रिय रहने के कारण काफी जकड़े हुए होते हैं।
अचानक उठने से क्या खतरा है?
डॉ. पांडे के अनुसार, जब सुबह के समय डिस्क्स पूरी तरह हाइड्रेटेड और आसपास की मांसपेशियां सख्त होती हैं, तो शरीर पर अचानक से वजन या दबाव डालने पर पीठ में तेज दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव (Muscle Strain) या रीढ़ की हड्डी से जुड़ी पुरानी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
बिस्तर से उठने का सही और सुरक्षित तरीका:
विशेषज्ञों ने सुबह सुरक्षित तरीके से उठने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
- धीमी शुरुआत: आंख खुलने के बाद बिस्तर पर ही एक या दो मिनट रुकें। उठने से पहले अपने टखनों (Ankles), घुटनों, कूल्हों और गर्दन को धीरे-धीरे हिलाएं ताकि रक्त संचार बेहतर हो सके।
- करवट लेकर उठें: सीधे पीठ के बल उठने (जैसे सिट-अप्स करते हैं) के बजाय पहले एक तरफ करवट लें। अपने घुटनों को थोड़ा मोड़ें और हाथों का सहारा लेते हुए धीरे से बैठने की स्थिति में आएं। इससे निचली पीठ (Lower Back) पर दबाव बहुत कम हो जाता है।
- किनारे पर बैठें: बिस्तर के किनारे पर आकर एक मिनट के लिए बैठें, जिससे शरीर का संतुलन सामान्य हो सके और सुबह होने वाले चक्कर या भारीपन से बचा जा सके।
- हल्की गतिविधि: उठने के बाद कमरे में थोड़ा सा टहलें या हल्की स्ट्रेचिंग करें।
- भारी एक्सरसाइज से बचें: सुबह उठते ही अचानक से आगे झुकना या शरीर को तेजी से मरोड़ना (Twisting) भारी पड़ सकता है, इसलिए तुरंत भारी स्ट्रेचिंग करने से बचें।