मंगलवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 24,000 के नीचे फिसल गया। बाजार में आई इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में करीब 5.41 लाख करोड़ रुपये की कमी दर्ज की गई।
सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
दोपहर 2:20 बजे तक:
- सेंसेक्स 546.77 अंक गिरकर 76,547.30 पर कारोबार कर रहा था।
- कारोबार के दौरान सेंसेक्स 722 अंक टूटकर 76,371.70 के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।
- निफ्टी 200 अंक गिरकर 23,909.45 पर कारोबार कर रहा था।
- दिन के दौरान निफ्टी 240 अंक टूटकर 23,862.65 तक पहुंच गया।
किन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
बीएसई पर सबसे ज्यादा दबाव आईटी और मेटल शेयरों में देखने को मिला। प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में शामिल रहे:
- Infosys
- TCS
- Tech Mahindra
- Tata Steel
- Adani Ports
इन शेयरों में कारोबार के दौरान 3.5% तक की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार में गिरावट के प्रमुख कारण
1. दक्षिण कोरिया के KOSPI में भारी बिकवाली
एशियाई बाजारों से मिले कमजोर संकेत भारतीय बाजार पर भी भारी पड़े। दक्षिण कोरिया का प्रमुख इंडेक्स KOSPI हालिया रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद तेज गिरावट का शिकार हुआ।
- सेमीकंडक्टर कंपनियों में भारी मुनाफावसूली देखी गई।
- SK Hynix में 12% से ज्यादा गिरावट आई।
- Samsung Electronics के शेयर लगभग 13% टूट गए।
- बाजार में अत्यधिक वैल्यूएशन की चिंताओं के कारण निवेशकों ने बिकवाली की।
- हालात इतने गंभीर हो गए कि कोरिया एक्सचेंज को 20 मिनट के लिए कारोबार रोकना पड़ा।
2. टेक्नोलॉजी शेयरों में दबाव
वैश्विक टेक शेयरों में कमजोरी का असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी पड़ा। विदेशी निवेशकों ने टेक्नोलॉजी शेयरों में मुनाफावसूली की, जिससे इंफोसिस, टीसीएस और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली।
3. वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता
वैश्विक आर्थिक संकेतकों, ब्याज दरों को लेकर चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बढ़ती अस्थिरता के कारण निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं। इसका असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी पड़ा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक कारणों से प्रेरित है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता लौटती है, तो भारतीय बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है।