आज के समय में UPI (Unified Payments Interface) हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। चाय की दुकान से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक लोग कैश की जगह मोबाइल से स्कैन कर भुगतान करना पसंद करते हैं। बिना जेब में पैसे रखे कुछ सेकंड में पेमेंट हो जाना डिजिटल इंडिया की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जाता है।
लेकिन अब UPI और डिजिटल पेमेंट सिस्टम से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने की संभावना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में मंगलवार, 4 अगस्त को ‘कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पेश किया है। यह बिल देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम, टैक्स व्यवस्था और कारोबार से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखता है।
UPI के फ्री मॉडल पर उठे सवाल
अब तक देश में UPI ट्रांजैक्शन को आम लोगों के लिए मुफ्त रखा गया है। इसकी बड़ी वजह पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 का सेक्शन 10A है। इस प्रावधान के तहत बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर्स को डिजिटल पेमेंट पर MDR (Merchant Discount Rate) यानी लेनदेन शुल्क लगाने से रोका गया था।
इस नियम की वजह से ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के UPI से भुगतान कर पाते हैं। छोटे दुकानदारों और व्यापारियों के लिए भी यह व्यवस्था काफी फायदेमंद रही है।
नए बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित है?
नए विधेयक में इसी जीरो MDR व्यवस्था को खत्म करने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह बदलाव लागू होता है तो भविष्य में बैंक और पेमेंट कंपनियां UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने में सक्षम हो सकती हैं।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि तुरंत हर UPI भुगतान पर चार्ज लगना शुरू हो जाएगा। शुल्क लगाने का फैसला भविष्य में सरकार, नियामक और संबंधित संस्थाओं की नीतियों पर निर्भर करेगा।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
UPI के जरिए रोजाना करोड़ों लोग छोटे-बड़े भुगतान करते हैं। ऐसे में यदि किसी तरह का शुल्क लागू होता है, तो इसका असर आम ग्राहकों और छोटे व्यापारियों दोनों पर पड़ सकता है।
हालांकि, सरकार का उद्देश्य डिजिटल पेमेंट सिस्टम को कमजोर करना नहीं, बल्कि इसके लंबे समय तक टिकाऊ विकास के लिए नए विकल्प तलाशना बताया जा रहा है। UPI के संचालन, सुरक्षा और विस्तार के लिए पेमेंट कंपनियों के सामने भी खर्च बढ़ते जा रहे हैं।
कारोबार और डिजिटल इकोसिस्टम पर असर
UPI ने भारत में डिजिटल लेनदेन को काफी बढ़ावा दिया है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक, सभी ने इसे अपनाया है। नए नियमों से पेमेंट कंपनियों के लिए कमाई का नया रास्ता खुल सकता है, लेकिन इससे डिजिटल भुगतान की लागत को लेकर नई बहस भी शुरू हो सकती है।
आने वाले समय में यह साफ होगा कि सरकार इस प्रस्ताव को किस तरह लागू करती है और UPI उपयोगकर्ताओं के लिए क्या व्यवस्था तय की जाती है। फिलहाल यह बिल डिजिटल पेमेंट सिस्टम के भविष्य को लेकर एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।