बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी के व्यापारियों और उद्यमियों ने सरकारी राजस्व अभिलेखों से 'केसर-ए-हिंद' जैसे औपनिवेशिक दौर के शब्दों को हटाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यह केवल रिकॉर्ड में बदलाव का मामला नहीं, बल्कि स्वतंत्र भारत की पहचान, सांस्कृतिक अस्मिता और ऐतिहासिक सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
मंगलवार को पराड़कर भवन में मालवीय मार्केट व्यावसायिक संघ और शरणार्थी व्यापार महामंडल, काशी की ओर से आयोजित परिचर्चा में इस मुद्दे पर चर्चा की गई। व्यापारियों ने कहा कि शहर के कोतवाली थाने से जुड़ी आराजी संख्या के राजस्व रिकॉर्ड में आज भी ब्रिटिश शासनकाल का 'केसर-ए-हिंद' शब्द दर्ज है।
व्यापारियों का कहना है कि आजादी के करीब आठ दशक बाद भी सरकारी अभिलेखों में ऐसे औपनिवेशिक शब्द बने रहना यह दिखाता है कि राजस्व रिकॉर्ड का समय-समय पर आवश्यक अपडेट नहीं किया गया। उन्होंने सरकार से ऐसे सभी पुराने औपनिवेशिक उल्लेखों की समीक्षा कर उन्हें हटाने की मांग की।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि स्वतंत्र भारत के सरकारी दस्तावेजों में औपनिवेशिक शासन की पहचान वाले शब्दों की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने प्रशासन से जल्द कार्रवाई कर राजस्व अभिलेखों को वर्तमान समय के अनुरूप संशोधित करने की अपील की।