भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) ने वित्त वर्ष 2027 के लिए महंगाई (Inflation) के अनुमान को 5.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया है। यह फैसला वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई नरमी और सप्लाई-साइड दबाव कम होने के बाद लिया गया है। आरबीआई का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई पर नियंत्रण बनाए रखने में इन दोनों कारकों की अहम भूमिका रहेगी।
आरबीआई के नए अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1) में महंगाई दर 4.1 फीसदी रहने का अनुमान है, जबकि पहले इसे 4.2 फीसदी बताया गया था। दूसरी तिमाही (Q2) का अनुमान 5.1 फीसदी से घटाकर 4.7 फीसदी कर दिया गया है। वहीं तीसरी तिमाही (Q3) के लिए अनुमान 5.9 फीसदी पर बरकरार रखा गया है, जबकि चौथी तिमाही (Q4) का अनुमान 5.4 फीसदी से बढ़ाकर 5.5 फीसदी कर दिया गया है। आरबीआई का कहना है कि महंगाई से जुड़े जोखिम फिलहाल संतुलित हैं और तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद धीरे-धीरे कम हो सकती है।
इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए कोर महंगाई (Core Inflation) का अनुमान भी 4.7 फीसदी से घटाकर 4.3 फीसदी कर दिया है। कोर महंगाई में खाद्य और ईंधन जैसी अस्थिर कीमतों को शामिल नहीं किया जाता, इसलिए इसे अर्थव्यवस्था में वास्तविक मूल्य दबाव का बेहतर संकेतक माना जाता है। इस अनुमान में कमी यह दर्शाती है कि अर्थव्यवस्था में लागत संबंधी दबाव पहले की तुलना में सीमित बने हुए हैं।
आरबीआई के अनुसार, पहली तिमाही की वास्तविक महंगाई दर अनुमान से थोड़ी कम रही, जिससे यह संकेत मिलता है कि व्यापक स्तर पर कीमतों में तेज बढ़ोतरी का दबाव फिलहाल नहीं है। हालांकि, खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतें आने वाले महीनों में महंगाई को प्रभावित कर सकती हैं। केंद्रीय बैंक का मानना है कि फिलहाल महंगाई का दबाव सीमित क्षेत्रों तक ही केंद्रित है और इसके व्यापक रूप से फैलने के संकेत नहीं मिले हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत बनी रहती है, तो आने वाले समय में महंगाई को आरबीआई के लक्ष्य के दायरे में बनाए रखना आसान हो सकता है। हालांकि, मौसम, अंतरराष्ट्रीय बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे चलकर महंगाई की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
आरबीआई का यह संशोधित अनुमान निवेशकों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। महंगाई में नियंत्रण रहने से लोगों की क्रय शक्ति बेहतर हो सकती है और अर्थव्यवस्था की विकास दर को भी समर्थन मिलने की संभावना है। हालांकि, खाद्य और ईंधन की कीमतों पर लगातार नजर बनाए रखना आने वाले महीनों में बेहद जरूरी रहेगा।