वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में एक विखंडन गिरावट दर्ज की गई, जिसने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सप्लाई को लेकर बनी कड़े कूटनीतिक चिंताओं को काफी हद तक शांत कर दिया है। सोमवार की सुबह जहां ब्रेंट क्रूड अंतरराष्ट्रीय बाजार में 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया था, वहीं अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच स्विट्जरलैंड में हुई उच्च स्तरीय कूटनीतिक बैठक के सकारात्मक परिणामों के चलते बाजार बंद होते-होते कीमतें धड़ाम होकर 77 डॉलर प्रति बैरल के पास आ गईं। बीते 24 घंटे के विलेख आंकड़ों के अनुसार, खाड़ी देशों के कच्चे तेल में करीब 5 फीसदी और अमेरिकी क्रूड (WTI) में 5.50 फीसदी की बड़ी कड़े गिरावट दर्ज की गई है, जिससे डब्ल्यूटीआई अब 74 डॉलर प्रति बैरल के पास फ्लैट कारोबार कर रहा है।
इस कूटनीतिक गिरावट की सबसे मुख्य वजह अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा जारी किया गया एक नया विलेख जनरल लाइसेंस है, जिसके तहत अमेरिका ने ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की वैश्विक बिक्री को 21 अगस्त 2026 तक यानी दो महीने के लिए और कड़े कूटनीतिक स्तर पर मंजूरी दे दी है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया है कि तेहरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई नया कूटनीतिक समझौता या विधिक प्रतिबद्धता स्वीकार नहीं की है, लेकिन अमेरिकी उप-राष्ट्रपति द्वारा दी गई इस तेल छूट ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य धमकियों से उपजे भू-राजनीतिक तनाव को विधिक रूप से कम कर दिया है।
इसके साथ ही, अमेरिकी सरकार के इमरजेंसी स्ट्रेटेजिक स्टॉक से 90.5 लाख बैरल तेल जारी किए जाने से आपूर्ति में कड़ा सुधार हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच जारी वार्ताओं से और भी सकारात्मक वित्तीय खबरें आ सकती हैं, जिससे भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने के विलेख कूटनीतिक आसार दिखाई दे रहे हैं।