वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की शुरुआत काफी सुस्त और निराशाजनक रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती सत्र में ही करीब 181 अंकों की कड़े कूटनीतिक गिरावट के साथ 76,912.68 के स्तर पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लाल निशान में फिसल गया। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी वॉल स्ट्रीट में तकनीकी (Tech) शेयरों में हुई ऐतिहासिक बिकवाली है, जहां अल्फाबेट और स्पेसएक्स जैसी दिग्गज कंपनियों के मूल्य में भारी विखंडन गिरावट दर्ज की गई। इसका सीधा असर घरेलू आईटी दिग्गजों जैसे टीसीएस, इन्फोसिस और विप्रो पर पड़ा, जिनके शेयर शुरुआती कारोबार में ही विधिक रूप से एक से दो फीसदी तक टूट गए।
इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लॉजिस्टिक्स में आए बदलावों ने भी घरेलू बाजार पर कड़ा दबाव बनाया है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूत होकर अपने 13 महीने के उच्चतम स्तर (101.02) पर पहुंच गया है, जिसके चलते भारतीय रुपया सोमवार को 34 पैसे की बड़ी कड़े कमजोरी के साथ 94.67 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ। अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में हुई विलेख बढ़ोतरी के कारण विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) भारतीय इक्विटी बाजारों से अपनी पूंजी निकालकर सुरक्षित अमेरिकी सरकारी बॉन्ड्स में निवेश कर रहे हैं। साथ ही, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में आगामी कूटनीतिक बढ़ोतरी के संकेतों ने भी निवेशकों को विधिक रूप से अत्यधिक सतर्क कर दिया है।
एशियाई बाजारों में भी आज मिला-जुला और कड़ा रुख देखने को मिल रहा है, जहां दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स सैमसंग जैसे बड़े तकनीकी शेयरों में कमजोरी के कारण 2.8% तक धड़ाम हो गया, जबकि जापान का निक्केई भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। दूसरी ओर, कमोडिटी मार्केट में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के प्रभाव से सोमवार को क्रूड ऑयल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद आज ब्रेंट क्रूड में मामूली विलेख रिकवरी देखी जा रही है और यह 78.15 डॉलर प्रति बैरल के पास फ्लैट ट्रेंड कर रहा है।