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बिना भूख कम किए फैट बर्न करेगा नया कंपाउंड TOFA? चूहों पर स्टडी में दिखे नतीजे, पर इंसानों के लिए अभी नहीं है सुरक्षित

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Posted On:Monday, August 31, 2026

वजन घटाने और मोटापे के इलाज में ओज़ेम्पिक (Ozempic) और मौनजारो (Mounjaro) जैसी GLP-1 दवाओं ने हाल के वर्षों में काफी लोकप्रियता हासिल की है। हालांकि, ये दवाएं मुख्य रूप से भूख और तृप्ति (Satiety) पर काम करती हैं, जिससे व्यक्ति कम खाता है। अब वैज्ञानिकों ने वजन घटाने का एक बिल्कुल अलग तरीका खोजा है।
'साइंस एडवांसेज' (Science Advances) जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी के अनुसार, 'TOFA' (5-(tetradecyloxy)-2-furoic acid) नामक एक रासायनिक कंपाउंड बिना खुराक कम किए शरीर की चर्बी घटाने में मदद कर सकता है।
क्या है यह नया फॉर्मूला और कैसे करता है काम?
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले (UC Berkeley) के मेटाबोलिक बायोलॉजिस्ट प्रोफेसर एंडर्स नायर (Anders Näär) के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि:

  • एनर्जी बर्न करने पर फोकस: शरीर का वजन दो मुख्य कारकों पर निर्भर करता है—पहला कम कैलोरी लेना और दूसरा ज्यादा ऊर्जा खर्च करना। जहां GLP-1 दवाएं भूख घटाकर काम करती हैं, वहीं TOFA शरीर के ऊर्जा खर्च (Energy Expenditure) को बढ़ाने का काम करता है।
  • फैट सिंथेसिस पर रोक: यह कंपाउंड शरीर में नए फैट के निर्माण को रोकता है और फैट बर्न करने वाले रास्तों को सक्रिय करता है।
  • 18% तक ज्यादा ऊर्जा बर्न: चूहों पर किए गए प्रयोगों में इस मॉलिक्यूल के इस्तेमाल से कोशिकाओं ने 18% तक अधिक ऊर्जा खर्च की, जबकि उनकी शारीरिक गतिविधि या शरीर के तापमान में कोई बदलाव नहीं आया।
  • मांसपेशियों का नुकसान नहीं: TOFA के इस्तेमाल से चूहों का फैट तो घटा, लेकिन उनकी मांसपेशियों (Lean Muscle Mass) पर कोई खास नकारात्मक असर नहीं पड़ा। इसके अलावा ब्लड शुगर और फैटी लिवर की समस्या में भी सुधार देखा गया।
क्या इंसानों के लिए सुरक्षित है TOFA?
स्टडी के उत्साहजनक नतीजों के बावजूद विशेषज्ञों ने साफ चेतावनी दी है कि इसे अभी वजन घटाने की दवा या सप्लीमेंट समझने की भूल न करें।
  • इंसानों पर नहीं हुआ परीक्षण: TOFA का ट्रायल केवल चूहों पर किया गया है। इंसानों में यह उसी तरह काम करेगा या नहीं, इसकी सही खुराक क्या होगी और इसके क्या साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, यह अभी तय नहीं है।
  • लैब केमिकल है, दवा नहीं: विशेषज्ञों के मुताबिक, प्री-क्लीनिकल सफलता सीधे तौर पर क्लिनिकल प्रमाण नहीं होती। सैकड़ों मॉलिक्यूल जानवरों पर सफल होते हैं लेकिन मानव परीक्षणों में असफल हो जाते हैं। जब तक रैंडमाइज्ड ह्यूमन ट्रायल में इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित नहीं होती, यह केवल एक प्रायोगिक प्रयोगशाला कंपाउंड है।
खुद इस्तेमाल करने से बचें:
रिसर्च-ग्रेड TOFA कोई स्वीकृत फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को अभी केवल प्रमाणित और वैज्ञानिक तरीकों पर ही भरोसा करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध मोटापे के इलाज के लिए एक नया दृष्टिकोण जरूर पेश करता है, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे अभी केवल 'उम्मीदजनक' (Promising) कहा जा सकता है, 'प्रमाणित' (Proven) नहीं।


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