बनारस न्यूज डेस्क: उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी पकड़ बनाए रखी है। सपा ने वाराणसी शिक्षक एमएलसी सीट पर दोबारा जीत दर्ज की है, जबकि वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में भी उसकी निर्णायक बढ़त बताई जा रही है। पार्टी ने आगरा शिक्षक सीट भी अपने नाम की। हालांकि, कुल नतीजों में बीजेपी आगे रही और उसने पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि एक अन्य सीट पर उसकी बढ़त रही।
बीजेपी ने लखनऊ शिक्षक, मेरठ-सहारनपुर शिक्षक, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक और मेरठ-सहारनपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की कुल 11 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इन चुनावों के नतीजों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों की स्थिति समझने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
क्या होती हैं शिक्षक और स्नातक निर्वाचन सीटें?
शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र उन राज्यों में होते हैं, जहां विधानमंडल के दो सदन होते हैं—विधानसभा और विधान परिषद। संविधान बनाने के समय यह विचार सामने आया था कि परिषद में शिक्षकों और पढ़े-लिखे लोगों के लिए अलग प्रतिनिधित्व होने से जाति, धर्म, पैसे और बाहुबल जैसे कारकों का प्रभाव कम करने में मदद मिल सकती है।
इसी व्यवस्था के तहत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में केवल पात्र और पंजीकृत शिक्षक ही वोट डाल सकते हैं, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले और पंजीकृत स्नातक मतदाता मतदान करते हैं। आम जनता इन सीटों के चुनाव में सीधे वोट नहीं डालती। इन चुनावों में वरीयता आधारित मतदान प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें मतदाता उम्मीदवारों को अपनी पसंद के क्रम में चुनते हैं।