भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व उपकप्तान और दिग्गज मध्यक्रम बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने हाल ही में खेल के सभी प्रारूपों से संन्यास की आधिकारिक घोषणा की है। भावुक वीडियो संदेश जारी कर क्रिकेट जगत को अलविदा कहने वाले रहाणे ने स्पष्ट किया कि भले ही बतौर खिलाड़ी मैदान पर उनका सफर समाप्त हो गया हो, लेकिन वे युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देकर खेल से जुड़े रहेंगे। संन्यास के बाद अब रहाणे भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) की कल्याणकारी पेंशन योजना (Welfare Scheme) के तहत सर्वोच्च श्रेणी के हकदार बन गए हैं।
बीसीसीआई के मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुसार, जिन पूर्व खिलाड़ियों ने भारत के लिए 25 या उससे अधिक टेस्ट मैच खेले हैं, उन्हें बोर्ड द्वारा प्रति माह 70,000 रुपये की आजीवन पेंशन दी जाती है। रहाणे ने अपने करियर में 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में देश का प्रतिनिधित्व किया है, जिसके चलते वे इस पेंशन स्लैब के पूर्ण पात्र हैं। इस पेंशन फंड का वित्तपोषण आईपीएल (IPL) प्लेऑफ मुकाबलों, टिकटों की बिक्री और 'प्लेटिनम जुबली कॉर्पस फंड' के जरिए किया जाता है, ताकि पूर्व खिलाड़ियों का वित्तीय भविष्य सुरक्षित रहे।
चूंकि रहाणे घरेलू क्रिकेट में मुंबई की कप्तानी भी कर चुके हैं, इसलिए वे मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की पेंशन योजना के दायरे में भी आते हैं। हालांकि, नियमों के मुताबिक कोई भी खिलाड़ी एक साथ बीसीसीआई और राज्य संघ दोनों से पेंशन का लाभ नहीं ले सकता। खिलाड़ी के पास अधिक वित्तीय लाभ वाली एक योजना चुनने का विकल्प होता है। साथ ही नियम यह भी है कि यदि रहाणे भविष्य में बीसीसीआई में किसी वैतनिक प्रशासनिक पद पर आसीन होते हैं, तो उस अवधि के लिए पेंशन रोक दी जाएगी।