ईरान संघर्ष गहराने से अमेरिकी मिसाइल भंडार में भारी कमी: हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर मंडराया संकट, कांग्रेस फंड अटकने से हथियारों की आपूर्ति धीमी
वॉशिंगटन: ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियानों और भू-राजनीतिक विन्यास में हालिया तनाव के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को एक अभूतपूर्व रणनीतिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के शुरुआती चरण के कड़े हमलों के बाद पेंटागन के हथियारों का अभेद्य सुरक्षा कवच विखंडित होने की कगार पर है। सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, यदि ईरान के खिलाफ युद्ध मौजूदा सांख्यिकी रफ्तार से जारी रहता है, तो वाशिंगटन के पास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन और उत्तर कोरिया जैसे नए बड़े मोर्चों पर किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक्स और मिसाइल इंटरसेप्टर का भारी टोटा पड़ जाएगा।
इस सामरिक विलेख और सांख्यिकी आंकड़ों पर गौर करें तो पूर्ण स्तर की लड़ाई के दौरान पेंटागन ने अपने कम से कम आधे थॉड (THAAD) बैलिस्टिक मिसाइल इंटरसेप्टर, लगभग 50 प्रतिशत पैट्रियट मिसाइल इंटरसेप्टर और तकरीबन 30 फीसदी टोमाहॉक लैंड-अटैक मिसाइलें खर्च कर दी हैं। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम को 'समाप्त' घोषित करने के बाद हथियारों की खपत के नियम पुनः कड़े हो गए हैं। आपूर्ति बहाल करने की मौजूदा समय सारणी के विलेख दर्शाते हैं कि अमेरिका को प्रति माह केवल 15 टोमाहॉक और 20 पैट्रियट मिसाइलें ही मिल पा रही हैं, जबकि साल 2026 के लिए किसी भी नए थॉड मिसाइल की डिलीवरी का अनुमान शून्य है। विश्लेषकों का मानना है कि इस विखंडनकारी कमी को पूरा करने और स्टॉक को युद्ध-पूर्व स्तर पर लाने में तीन से पांच साल का लंबा समय लग सकता है।
इस पूरे संकट ने अमेरिकी कैपिटल हिल में एक नया पुराना विवाद मुस्तैद कर दिया है। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी कांग्रेस ने अभी तक युद्ध में प्रयुक्त गोला-बारूद की भरपाई के लिए विशेष आपातकालीन बजटीय नियमों को मंजूरी नहीं दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने मिसाइल उत्पादन में तेजी लाने और विधिक बाधाओं को दूर करने के लिए रक्षा उत्पाद अधिनियम (Defense Production Act) को लागू कर दिया है, लेकिन इसका तात्कालिक प्रभाव बेहद सीमित है। वैश्विक स्तर पर यूक्रेन और जर्मनी को पैट्रियट मिसाइल प्रणालियों के घरेलू विनिर्माण का लाइसेंस देने जैसे कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं, परंतु इन अंतरराष्ट्रीय उत्पादन साझेदारियों को मुस्तैद होने में लंबा समय लगेगा। खेल अब पूरी तरह से इस मिसाइल आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और चीन-उत्तर कोरिया के खिलाफ सैन्य प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के विधिक नियमों पर टिका है।