मस्कट: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवन रेखा माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के सैन्य तनाव के बीच एक बड़ा कूटनीतिक इंफ्रास्ट्रक्चर विन्यास सामने आया है। ओमान ने इस रणनीतिक जलमार्ग से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बिना किसी पारगमन शुल्क (टोल) के दो अलग-अलग नौवहन गलियारे (शिपिंग कॉरिडोर) बनाने का एक कड़ा प्रस्ताव रखा है। इस कूटनीतिक पहल को अंतिम रूप देने के लिए मस्कट में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अलबुसैदी के बीच उच्च स्तरीय बैठक मुस्तैद हुई, जिसमें मध्यस्थ देश कतर का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल भी विधिक रूप से शामिल रहा।
इस सांख्यिकी प्रस्ताव के नियमों और विलेखों पर गौर करें तो ओमान द्वारा तैयार किए गए इस द्विवार्षिक प्लान के तहत दोनों गलियारे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के लिए खुले रहेंगे। इसके तहत ओमान के प्रादेशिक जलक्षेत्र से गुजरने वाले 'दक्षिणी गलियारे' में जहाजों का आवागमन पुराने नियमों के तहत सामान्य रूप से संचालित होगा, जैसा कि क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से पहले होता था। इसके विपरीत, ईरान के प्रादेशिक जलक्षेत्र से होकर जाने वाले 'उत्तरी गलियारे' का उपयोग करने वाले जहाजों को यात्रा शुरू करने से पहले ईरानी अधिकारियों से प्रशासनिक नियमों के तहत अनुमति लेनी होगी। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की है कि तटीय देशों के कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें अंतरराष्ट्रीय कानूनों के सुरक्षा कवच के तहत इस यातायात प्रबंधन विन्यास की समीक्षा कर रही हैं।
विगत हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच हुई जवाबी सैन्य कार्रवाइयों के कारण वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने कड़े सांख्यिकी खतरे की चेतावनी दी थी। खेल अब पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निर्बाध नौवहन की मांग और ईरान की सुरक्षा चिंताओं के बीच कूटनीतिक संतुलन बनाने पर टिका है। ओमान और कतर की यह संयुक्त मध्यस्थता वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति श्रृंखला के नियमों को टूटने से बचाने और शिपिंग लाइनों को एक नया इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा कवच प्रदान करने का एक मुस्तैद और सराहनीय प्रयास है।