मुंबई। अंतरबैंकिंग विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूती का प्रदर्शन किया। डॉलर के मुकाबले रुपया 26 पैसे की बढ़त के साथ 95.50 प्रति डॉलर के स्तर पर बंद हुआ। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर में आई नरमी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारतीय बाजार में बढ़ती दिलचस्पी ने रुपये को मजबूत आधार प्रदान किया है।
कारोबार की शुरुआत में भी रुपया मजबूती के साथ खुला। दिनभर के कारोबार के दौरान विनिमय दर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन सत्र के अंतिम चरण में भारतीय मुद्रा ने अपनी बढ़त कायम रखते हुए मजबूत स्तर पर कारोबार समाप्त किया। पिछले पांच कारोबारी दिनों में रुपये ने कुल मिलाकर एक रुपये से अधिक की मजबूती दर्ज की है, जिसे हाल के समय का सकारात्मक रुझान माना जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किए जाने और भविष्य में दरों को लेकर सतर्क संकेत मिलने के बाद वैश्विक निवेशकों का रुझान उभरते बाजारों की ओर बढ़ा है। इसका लाभ भारतीय शेयर और मुद्रा बाजार दोनों को मिला। साथ ही, डॉलर इंडेक्स में कमजोरी आने से भी रुपये पर दबाव कम हुआ और भारतीय मुद्रा को मजबूती मिली।
विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय पूंजी बाजार में लगातार निवेश भी रुपये के पक्ष में महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है। विदेशी निवेश बढ़ने से डॉलर की आपूर्ति में सुधार होता है, जिससे घरेलू मुद्रा को समर्थन मिलता है। इसके अलावा, भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिर विकास दर और मजबूत वित्तीय संकेतकों ने भी निवेशकों का भरोसा बनाए रखा है।
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर आगे भी नजर बनी रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर दोबारा मजबूत होता है या कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी होती है, तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों की निगाहें आने वाले आर्थिक संकेतकों और विदेशी निवेश के रुझान पर टिकी हुई हैं, जो भारतीय मुद्रा की आगे की दिशा तय करेंगे।