आकलन वर्ष 2026-27 के लिए आयकर विवरण (ITR) दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 समाप्त होने के बाद अब करोड़ों करदाता अपने रिफंड का इंतजार कर रहे हैं। जहां आयकर विभाग ने कई करदाताओं के बैंक खातों में रिफंड की राशि जमा करना शुरू कर दिया है, वहीं बड़ी संख्या में करदाताओं को अभी तक रिफंड प्राप्त नहीं हुआ है। टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आईटीआर फाइल करने के कई हफ्तों बाद भी रिफंड खाते में क्रेडिट नहीं हुआ है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय रिफंड स्टेटस (Refund Status) और ई-फाइलिंग पोर्टल पर विवरणों की जांच करना बेहद आवश्यक है।
रिफंड अटकने का सबसे प्रमुख कारण फाइल किए गए विवरण का ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) न होना है। आयकर नियमानुसार, आईटीआर जमा करने के बाद 30 दिनों के भीतर आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए वेरिफिकेशन अनिवार्य है; इसके बिना विभाग रिफंड प्रक्रिया शुरू नहीं करता। इसके अतिरिक्त, करदाता के पैन (PAN) विवरण का बैंक खाते से लिंक न होना, आईएफएससी (IFSC) कोड अथवा खाता संख्या में त्रुटि होना और बैंक रिकॉर्ड में नाम का पैन कार्ड से मेल न खाना भी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसफर फेल होने की मुख्य वजह बनते हैं।
विभाग द्वारा डेटा प्रोसेसिंग के दौरान टीडीएस (TDS) और फॉर्म 26AS/AIS में घोषित आय के बीच अंतर पाए जाने पर भी रिफंड रोक दिया जाता है और करदाता को नोटिस जारी किया जा सकता है। इसके अलावा, यदि किसी करदाता की पिछले किसी आकलन वर्ष की कर देनदारी बकाया है, तो आयकर विभाग धारा 245 के तहत नोटिस भेजकर मौजूदा रिफंड को उस बकाए के खिलाफ समायोजित कर देता है। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे आयकर पोर्टल पर लॉगिन कर अपने 'नो युअॉर रिफंड स्टेटस' और बैंक खाता प्री-वैलिडेशन स्थिति की तुरंत जांच करें।