जयपुर में आयोजित ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की 16वीं बैठक में सदस्य देशों ने व्यापार को आसान बनाने और छोटे कारोबारियों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करने की दिशा में कई अहम फैसले किए। भारत की अध्यक्षता में हुई बैठक का समापन ‘जयपुर सहमति’ के साथ हुआ। इसमें ब्रिक्स देशों के बीच इनवॉयस डिस्काउंटिंग व्यवस्था विकसित करने पर सहमति बनी, जिससे कारोबारियों को अपने बकाया बिलों के बदले जल्द धन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
इनवॉयस डिस्काउंटिंग एक ऐसी वित्तीय व्यवस्था है, जिसमें कोई कारोबारी अपने ग्राहकों से मिलने वाली राशि के बकाया बिल को बैंक, वित्तीय संस्थान या डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भुनाकर तत्काल पूंजी प्राप्त कर सकता है। इससे विशेष रूप से छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए रोजमर्रा के कारोबार और कार्यशील पूंजी की जरूरतें पूरी करना आसान हो सकता है।
बैठक में निर्यात से जुड़े सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए क्रेडिट आकलन के नए दिशा-निर्देशों को भी स्वीकार किया गया। प्रस्तावित व्यवस्था में कारोबार की ऋण क्षमता का आकलन केवल संपत्ति या गारंटी के आधार पर करने के बजाय उसके वास्तविक नकदी प्रवाह को भी महत्व देने की बात कही गई है। इससे सीमित संपत्ति वाले छोटे उद्यमों के लिए औपचारिक वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच बढ़ने की उम्मीद है।
ब्रिक्स मंत्रियों ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने के साथ विश्व व्यापार संगठन की भूमिका के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराई। विकासशील देशों के हितों और खाद्य एवं आजीविका सुरक्षा के लिए नीतिगत लचीलेपन पर जोर दिया गया।
बैठक में 2026-30 की अवधि के लिए वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जुड़ी कार्ययोजना और डिजिटल सेवाओं को सुगम बनाने के सिद्धांतों पर भी चर्चा हुई। साथ ही ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी रणनीति 2030 को अंतिम रूप देने की दिशा में प्रगति दर्ज की गई। इन प्रस्तावों को आगे ब्रिक्स नेताओं के समक्ष अनुमोदन के लिए रखा जाएगा।