असम में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे मुश्किल समय में अभिनेता रणदीप हुड्डा ने लोगों से आगे आकर मदद करने की अपील की है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक भावुक वीडियो साझा करते हुए कहा कि हर छोटी-बड़ी मदद बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि असम इस समय विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है और प्रभावित लोगों को भोजन, आश्रय तथा जरूरी सामान की तत्काल जरूरत है। उन्होंने राहत कार्यों में जुटी संस्था द ग्लोबल सिख्स के लिए दिए गए QR कोड के जरिए सहयोग करने की भी अपील की।
रणदीप द्वारा साझा किए गए वीडियो में बाढ़ प्रभावित इलाकों की गंभीर स्थिति दिखाई गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा के समय इंसानियत सबसे बड़ी ताकत होती है और हर व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देकर कई परिवारों की जिंदगी आसान बना सकता है। अभिनेता का मानना है कि छोटी-छोटी आर्थिक मदद भी राहत सामग्री, दवाइयों, अस्थायी आश्रय और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में बड़ा फर्क ला सकती है।
इस साल मानसून के दौरान असम के कई जिले भीषण बाढ़ की चपेट में आए। शिवसागर, चराइदेव और जोरहाट जैसे इलाकों में हालात सबसे ज्यादा गंभीर रहे, जहां लाखों लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ। बाढ़ से घर, सड़कें और खेती की जमीन को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि कई लोगों की जान भी चली गई। हालांकि कई क्षेत्रों में अब पानी घटने लगा है, लेकिन सामान्य स्थिति बहाल होने में अभी समय लगेगा और हजारों परिवार अब भी राहत एवं पुनर्वास पर निर्भर हैं।
राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के जरिए आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। इसके साथ ही प्रशासन क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत, किसानों की मदद और राहत शिविरों के संचालन पर भी काम कर रहा है। कई स्वयंसेवी संस्थाएं और सामाजिक संगठन भी लगातार प्रभावित इलाकों में जरूरी सामान पहुंचाने में जुटे हैं, ताकि लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन मिल सके।
रणदीप हुड्डा इससे पहले भी पर्यावरण और सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं। इस बार भी उन्होंने अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल राहत अभियान को मजबूत करने के लिए किया है। उनकी अपील यह याद दिलाती है कि संकट की घड़ी में सामूहिक प्रयास ही सबसे बड़ी ताकत बनते हैं। जब तक असम के प्रभावित परिवार पूरी तरह अपने पैरों पर खड़े नहीं हो जाते, तब तक हर सहयोग उनके लिए नई उम्मीद लेकर आ सकता है।