नयी दिल्ली: 167वें आयकर दिवस के उपलक्ष्य में नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रत्यक्ष कर प्रशासन को और अधिक करदाता-अनुकूल बनाने के लिए सात व्यापक सिद्धांतों (Seven Guiding Principles) की घोषणा की है। वित्त मंत्री ने आयकर विभाग से स्वैच्छिक अनुपालन को मजबूत करने, प्रौद्योगिकी का उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग करने, ई-फाइलिंग बुनियादी ढांचे में सुधार करने और मुकदमेबाजी को कम करने की दिशा में मुस्तैद क्रियान्वयन करने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि प्रत्यक्ष कर रिफंड (Income Tax Refund) के प्रसंस्करण की समय-सीमा को और घटाया जाए ताकि करदाताओं का भरोसा मजबूत हो सके और बाजार में वित्तीय तरलता बनी रहे।
सीतारमण ने बताया कि आयकर अधिनियम 2025 के लागू होने से कर कानूनों को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। सीबीडीटी (CBDT) के चेयरमैन रवि अग्रवाल की उपस्थिति में उन्होंने जानकारी साझा की कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 3.2 करोड़ से अधिक आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं, जिनमें से 94% का ऑनलाइन सत्यापन पूरा हो गया है। इसके अलावा, ई-निवारण पोर्टल और सीपीग्राम्स (CPGRAMS) के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का औसत समाधान समय घटकर अब 28 दिन रह गया है।
वित्त मंत्री ने अधिकारियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिटिक्स और ट्रांसफर प्राइसिंग जैसे आधुनिक विषयों में उन्नत प्रशिक्षण देने की सिफारिश की। उन्होंने कहा कि 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में आयकर विभाग की भूमिका केवल कर संग्रह तक सीमित न रहकर व्यापार सुगमता और संस्थागत उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की होनी चाहिए। अपने संबोधन के अंत में वित्त मंत्री ने मुंबई में नवनिर्मित अत्याधुनिक 'आयकर सिंधु' कार्यालय परिसर के आगामी उद्घाटन की भी घोषणा की।