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30 जून से कागज के नोट बंद होने वाली खबर निकली झूठी, सरकार ने बता दी पूरी सच्चाई

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Posted On:Wednesday, June 10, 2026

नई दिल्ली: यदि आपने भी पिछले कुछ दिनों में व्हाट्सएप, फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह सनसनीखेज खबर पढ़ी है कि 30 जून, 2026 से देश में सभी कागजी नोट बंद होने जा रहे हैं और उनकी जगह प्लास्टिक के नोट ले लेंगे, तो आपको बिल्कुल भी घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार के आधिकारिक डिजिटल विंग प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) फैक्ट चेक ने इस वायरल दावे की गहनता से पड़ताल करने के बाद इसे पूरी तरह से फर्जी (Fake News) और भ्रामक करार दिया है। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा कागजी मुद्रा को चलन से बाहर करने का कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है। आपके पास रखे सभी नोट पूरी तरह वैध और सुरक्षित हैं।

सोशल मीडिया पर कैसे फैला अफवाहों का बाजार?

जून महीने की शुरुआत से ही इंटरनेट पर एक मैसेज तेजी से प्रसारित किया जा रहा था। इस फर्जी पोस्ट में दावा किया जा रहा था कि केंद्र सरकार एक बार फिर देश में बड़ा वित्तीय बदलाव (Currency Reform) करने जा रही है और इस महीने के अंत तक ₹10, ₹20, ₹100, और ₹500 के सभी कागजी नोटों को वापस ले लिया जाएगा। लोगों को यह कहकर डराया जा रहा था कि यदि उन्होंने समय रहते अपने नोट नहीं बदले, तो वे रातों-रात बेकार हो जाएंगे।

इस झूठी खबर ने देश के आम नागरिकों, मध्यम वर्ग और विशेषकर छोटे-छोटे रेहड़ी-पटरी व ग्रामीण व्यापारियों में भारी बेचैनी और भ्रम पैदा कर दिया था। कई इलाकों से बैंकों में पूछताछ और नोट बदलने की होड़ की खबरें भी सामने आने लगी थीं, जिससे वित्तीय व्यवस्था पर बेवजह का दबाव बनने लगा था।

पीआईबी (PIB) ने जारी किया आधिकारिक बयान

स्थिति को अनियंत्रित होने से बचाने के लिए पीआईबी फैक्ट चेक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से इस अफवाह का खंडन किया है। पीआईबी ने साफ किया:

"सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक संदेश में यह फर्जी दावा किया जा रहा है कि आरबीआई 30 जून, 2026 से सभी कागजी नोटों को बंद कर के प्लास्टिक के नोट जारी करने जा रहा है। यह दावा पूरी तरह निराधार है। वित्त मंत्रालय और केंद्रीय बैंक ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है। आम जनता से अनुरोध है कि वे ऐसी किसी भी भ्रामक अफवाह पर विश्वास न करें और न ही इसे आगे शेयर करें।"

प्लास्टिक नोटों का सच क्या है?

वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंक (RBI) ने कुछ साल पहले ट्रायल के आधार पर ₹10 के प्लास्टिक (पॉलिमर) नोटों को चुनिंदा शहरों में प्रायोगिक तौर पर चलाने की योजना जरूर बनाई थी, क्योंकि प्लास्टिक नोटों की उम्र कागजी नोटों की तुलना में काफी लंबी होती है और इनकी नकल (Counterfeiting) करना लगभग नामुमकिन होता है। हालांकि, पूरे देश की मुख्य करेंसी को रातों-रात कागजी से प्लास्टिक में बदलना एक बेहद जटिल और महंगी प्रक्रिया है, जिस पर वर्तमान में कोई विचार नहीं किया जा रहा है। सरकार ने जनता से अपील की है कि वे केवल आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई सूचनाओं को ही सच मानें।


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