सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर कई तरह की अफवाहें भी चल रही हैं। कुछ लोगों का दावा है कि E20 पेट्रोल से इंजन खराब होने पर बीमा क्लेम नहीं मिलेगा, जबकि कुछ लोग पॉलिसी खत्म होने जैसी बातें भी कर रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों और सरकारी जानकारी के अनुसार स्थिति इतनी चिंताजनक नहीं है।
क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब हो रहे हैं?
सरकार ने E20 पेट्रोल को लेकर फैली आशंकाओं पर स्पष्ट किया है कि अभी तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल सामान्य परिस्थितियों में पुराने वाहनों के इंजन को खराब कर रहा है।
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की प्रक्रिया नई नहीं है। देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2001 से चरणबद्ध तरीके से हुई थी। समय के साथ इसमें इथेनॉल की मात्रा बढ़ाई गई और अब कई जगहों पर E20 पेट्रोल उपलब्ध है।
सरकार के अनुसार, देश में करोड़ों दोपहिया वाहन और कारें इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर चल रही हैं। अभी तक वाहन निर्माताओं की ओर से बड़े स्तर पर इंजन सीज होने, फ्यूल टैंक में जंग लगने या बड़े तकनीकी नुकसान जैसी कोई आधिकारिक शिकायत सामने नहीं आई है।
क्या E20 से खराबी होने पर इंश्योरेंस मिलेगा?
मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी आमतौर पर अचानक होने वाले नुकसान (accidental damage) को कवर करती है। लेकिन सामान्य टूट-फूट, रखरखाव की कमी या गलत ईंधन के इस्तेमाल से होने वाले नुकसान को अक्सर पॉलिसी में शामिल नहीं किया जाता।
अगर किसी वाहन में E20 पेट्रोल के कारण कोई तकनीकी समस्या आती है, तो उसका क्लेम कई बातों पर निर्भर करेगा:
- वाहन की उम्र और मॉडल।
- निर्माता कंपनी की गाइडलाइन।
- नुकसान का कारण क्या पाया गया है।
- इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तें।
इसलिए हर मामले में क्लेम की मंजूरी अलग-अलग हो सकती है।
पुरानी कार वालों को क्या करना चाहिए?
पुराने वाहन मालिकों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां जरूर रखनी चाहिए:
- अपनी कार के मैनुअल में दिए गए फ्यूल संबंधी निर्देश देखें।
- समय पर सर्विस करवाएं।
- फ्यूल सिस्टम और रबर पार्ट्स की जांच कराते रहें।
- वाहन निर्माता की सलाह को प्राथमिकता दें।
कई नई गाड़ियां E20 फ्यूल के अनुकूल बनाई जा रही हैं, जबकि पुराने वाहनों में निर्माता की सिफारिशों को ध्यान में रखना जरूरी है।