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सुजलॉन एनर्जी पर सेबी का बड़ा एक्शन, पुरानी क्लीन चिट पलटी, कंपनी समेत पूर्व अधिकारियों पर लगा 29 करोड़ का जुर्माना

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Posted On:Saturday, May 30, 2026

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर की दिग्गज कंपनी सुजलॉन एनर्जी (Suzlon Energy) को एक बड़ा झटका दिया है। सेबी ने अपने ही एक पुराने फैसले को पलटते हुए सुजलॉन एनर्जी और उसके कई पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर कुल 28.95 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है।

यह पूरा मामला कंपनी के खातों में भ्रामक जानकारी देने और अंदर ही अंदर पैसों की हेराफेरी (फंड रोटेशन) से जुड़ा है। गौरतलब है कि जून 2025 में कंपनी को इस मामले में क्लीन चिट मिल गई थी, लेकिन अब नियामक ने इसे शेयर बाजार और निवेशकों के हितों के खिलाफ बताते हुए पुराना आदेश रद्द कर दिया है।

जुर्माने की चाबुक: किस पर कितनी पेनाल्टी?

सेबी के पूर्णकालिक सदस्य संदीप प्रधान द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, जुर्माने की राशि का वर्गीकरण कुछ इस प्रकार है:

नाम / पद जुर्माने की राशि
सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड (कंपनी) ₹15.95 करोड़
विनोद आर तांती (पूर्व वाइस-चेयरमैन) ₹5.75 करोड़
गिरीश आर तांती (पूर्व शीर्ष अधिकारी) ₹5.45 करोड़
कीर्ति जे वगाडिया (पूर्व सीएफओ) ₹1.50 करोड़
अमित अग्रवाल (पूर्व अधिकारी) ₹30 लाख

नियामक ने सभी दोषियों को यह जुर्माना राशि जमा करने के लिए 45 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। इस मामले की शुरुआत दिसंबर 2019 में मिली एक गुमनाम शिकायत के बाद हुई थी, जिसके बाद सेबी ने वित्त वर्ष 2014-15 से 2020-21 तक के खातों की फॉरेंसिक ऑडिट जांच कराई थी।


कागजी बाजीगरी: कैसे दिखाया गया बंपर मुनाफा?

सेबी की जांच में सामने आया कि कंपनी ने वित्तीय स्थिति को बेहतर दिखाने के लिए 'फंड रोटेशन' और कागजी हेरफेर का सहारा लिया था। इस विवाद का मुख्य कारण साल 2014 में हुआ एक सौदा है:

  • बिजनेस ट्रांसफर: सुजलॉन ने अपना ऑपरेशंस-मेंटेनेंस बिजनेस (OMS) अपनी ही एक सहायक कंपनी 'सुजलॉन ग्लोबल सर्विसेज लिमिटेड' (SGSL) को 2,000 करोड़ रुपये में बेच दिया।

  • वैल्यूएशन में बड़ा अंतर: चौंकाने वाली बात यह है कि इस बिजनेस की वास्तविक नेट बुक वैल्यू केवल 77 करोड़ रुपये थी। इस ऊंचे मूल्यांकन के दम पर कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट में 1,923 करोड़ रुपये का भारी मुनाफा दर्ज कर लिया।

  • पैसों को गोल-गोल घुमाना: सेबी के अनुसार, इस सौदे के 1,300 करोड़ रुपये बाहर से नहीं आए थे। मार्च 2017 के दौरान महज 150 करोड़ रुपये को 6 बार और 100 करोड़ रुपये को 4 बार सुजलॉन और SGSL के बीच लोन व डिबेंचर के रूप में रोटेट करके कागजों पर भुगतान होना दिखाया गया था।

यह आदेश निवेशकों के लिए एक सबक है कि कंपनियों के केवल सतही मुनाफे को देखने के बजाय उनकी वित्तीय पारदर्शिता और ऑडिट रिपोर्ट्स पर भी पैनी नजर रखनी चाहिए।


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