बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी की सतुआ बाबा पीठ के मुखिया महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा के नाम पर फर्जी आईडी बनाकर उनके परिचितों और संतों से ठगी का प्रयास करने का मामला सामने आया है। जालसाज फोन कॉल और मैसेज करके खुद को 'बाबा जी का प्रतिनिधि' बताकर पैसों की मांग कर रहा था। इस बात का खुलासा तब हुआ जब एक संत ने सतुआ बाबा को फोन कर उनके नाम पर आए संदिग्ध कॉल और पैसों की मांग की जानकारी दी।
इस घटना से अपनी छवि धूमिल होने की आशंका जताते हुए महामंडलेश्वर सतुआ बाबा ने चौक थाने में लिखित तहरीर देकर सख्त कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 319(2) और आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। थाना प्रभारी चौक दिलीप कुमार मिश्रा के अनुसार, साइबर सेल और सर्विलांस सेल की मदद से आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई है।
संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा विष्णु स्वामी संप्रदाय के 57वें आचार्य और सतुआ बाबा पीठ के प्रमुख हैं। महज 11 वर्ष की उम्र में गृहत्याग कर अध्यात्म से जुड़े संतोष दास को काशी विश्वनाथ का प्रतिनिधि भी माना जाता है। वर्ष 2012 में अपने गुरु ब्रह्मलीन यमुनाचार्य जी महाराज के निधन के बाद उन्होंने इस पीठ की जिम्मेदारी संभाली थी। प्रयागराज महाकुंभ 2025 के दौरान उन्हें 'जगदगुरु' की पदवी से भी विभूषित किया गया था।
पुलिस प्रशासन ने आम जनमानस और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात नंबर या संदिग्ध डिजिटल संदेशों के आधार पर पैसे न भेजें। साइबर टीम फोन नंबर और डिजिटल निशानों के जरिए साइबर अपराधी तक पहुंचने के लिए विभिन्न कोणों से जांच आगे बढ़ा रही है।