बनारस न्यूज डेस्क: वाराणसी में भीषण गर्मी के बीच गंगा नदी के जलस्तर में लगातार गिरावट और घाटों से दूर होती धारा ने वैज्ञानिकों तथा स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। गंगा संरक्षण और पर्यावरण पर लंबे समय से शोध कर रहे डॉ. बी.डी. त्रिपाठी के अनुसार पिछले डेढ़ दशक में गंगा के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि अस्सी घाट पर गंगा की धारा लगभग 30 मीटर तक पीछे हट गई है, जबकि वर्तमान में गंगा का जलस्तर 58.65 मीटर के आसपास पहुंच गया है।
तुलसी घाट से केदार घाट के बीच कई स्थानों पर सीढ़ियों पर काई जम गई है और गंगा के पानी का रंग भी धीरे-धीरे हरा दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अप्रैल के अंतिम सप्ताह से ही इसके संकेत मिलने लगे थे, लेकिन इस बार स्थिति पहले की तुलना में अधिक गंभीर नजर आ रही है। घाटों पर बढ़ती रेत और पीछे हटती धारा लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
डॉ. त्रिपाठी का मानना है कि गंगा पर बने बांधों और विभिन्न जल परियोजनाओं के कारण नदी के प्राकृतिक प्रवाह पर असर पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जलस्तर में गिरावट से गंगा की प्रदूषण को आत्मसात करने की क्षमता (डाइल्यूशन कैपेसिटी) कम हो रही है, जिससे नदी में प्रदूषण बढ़ने का खतरा है। इसका सीधा असर जलीय जीवों पर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गंगा की राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन अब शहरी क्षेत्रों से दूर कैथी क्षेत्र की ओर शिफ्ट हो रही हैं, क्योंकि कई स्थानों पर नदी की गहराई 4 से 6 फीट तक ही रह गई है।
वहीं आईआईटी बीएचयू के प्रोफेसर विश्वंभरनाथ मिश्र ने कहा कि गंगा के प्राकृतिक और गतिशील प्रवाह (डायनमिक फ्लो) में बदलाव के कारण घाटों और नदी के बीचों-बीच रेत के टीले तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि अस्सी नदी के मार्ग में बदलाव के कारण अस्सी घाट के आसपास रेत का बड़ा जमाव बन गया है। यदि नदी में पर्याप्त जलप्रवाह नहीं बढ़ा, तो घाटों से गंगा की दूरी और बढ़ सकती है।