नयी दिल्ली। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल लिमिटेड (CRISIL) के नवीन मैक्रोइकोनॉमिक विश्लेषण में अनुमान लगाया गया है कि चालू वित्तीय वर्ष में भारत का चालू खाता घाटा (CAD) बढ़कर देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 1.5 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच सकता है। गत वित्त वर्ष के दौरान यह आंकड़ा महज 0.6 प्रतिशत दर्ज किया गया था। वित्तीय वर्ष की शुरुआती तिमाही में व्यापार असंतुलन का असर स्पष्ट दिखा, जब घाटा बढ़कर 4.2 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि में 3.4 अरब डॉलर था।
विश्लेषण के अनुसार, व्यापार घाटे में इस बढ़ोतरी का प्राथमिक कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और अन्य प्रमुख कमोडिटीज की कीमतों में आई भारी तेजी है। आयात लागत में अप्रत्याशित उछाल के कारण वस्तु व्यापार घाटा 68.9 अरब डॉलर से बढ़कर 86.1 अरब डॉलर के स्तर पर चला गया। हालांकि, भारतीय सेवा क्षेत्र (Services Sector) के मजबूत निर्यात प्रदर्शन और बेहतर प्राप्तियों ने इस बढ़ते व्यापार घाटे को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद की है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक सुस्ती और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग में उत्पन्न अनिश्चितताओं का प्रभाव भारत के वस्तुओं के निर्यात पर बना रहेगा। दूसरी ओर, घरेलू मांग और महंगे कच्चे तेल का आयात भारत के विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को बढ़ाएगा। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि यद्यपि मौजूदा चुनौतियां दबाव बना रही हैं, लेकिन भारत के पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार और सेवा निर्यात के निरंतर आधार से देश का बाहरी आर्थिक संतुलन नियंत्रण में रहने की उम्मीद है।