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Mobile Manufacturing Scheme 2: भारत में मोबाइल उत्पादन दोगुना करने की तैयारी, सरकार ने लॉन्च की नई योजना

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Posted On:Saturday, August 22, 2026

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम-2 को औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत में मोबाइल फोन के उत्पादन को बढ़ावा देना और देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मजबूत करना है। सरकार की योजना इस स्कीम के जरिए मोबाइल फोन के उत्पादन को मौजूदा स्तर से दोगुना करने की है।

स्कीम को लॉन्च करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार भारतीय कंपनियों को मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के अलग-अलग स्तरों पर जरूरी सहयोग उपलब्ध कराएगी। इसका उद्देश्य केवल मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि इससे जुड़े पार्ट्स और कंपोनेंट्स का मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना भी है।

मोबाइल पार्ट्स के लिए मजबूत होगा घरेलू इकोसिस्टम

भारत में मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग का दायरा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। अब सरकार का फोकस मोबाइल असेंबलिंग से आगे बढ़कर उसके जरूरी कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन पर है। इससे देश में सप्लाई चेन मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि एक मोबाइल फोन में करीब 1,000 अलग-अलग पार्ट्स होते हैं। इन पार्ट्स के निर्माण से जुड़े इकोसिस्टम में बड़ी संख्या में MSME कंपनियां भी शामिल हैं। सरकार इन कंपनियों को बढ़ावा देकर देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का आधार और मजबूत करना चाहती है।

अगर मोबाइल के जरूरी कंपोनेंट्स का उत्पादन भारत में ही बढ़ता है, तो कंपनियों को विदेशों से पार्ट्स मंगाने पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। इससे घरेलू कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर और रोजगार के रास्ते भी खुल सकते हैं।

मेमोरी चिप की कीमतों पर भी सरकार की नजर

मोबाइल फोन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी अश्विनी वैष्णव ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि फिलहाल मेमोरी चिप की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिसका असर मोबाइल फोन की लागत और कीमत पर पड़ सकता है।

सरकार देश में मेमोरी चिप के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने पर भी काम कर रही है। इसके लिए भारत में मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। घरेलू स्तर पर मेमोरी चिप और अन्य महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स का उत्पादन बढ़ने से लंबे समय में भारत की आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।

भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की कोशिश

मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम-2 को भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि भारत केवल मोबाइल फोन असेंबल करने वाला देश न रहे, बल्कि मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े ज्यादातर महत्वपूर्ण पार्ट्स का निर्माण भी देश में हो।

इससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा बनने का मौका मिल सकता है। साथ ही, घरेलू उत्पादन बढ़ने से इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में निवेश, रोजगार और तकनीकी क्षमता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम-2 के जरिए सरकार भारत के मोबाइल उद्योग को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रही है। उत्पादन को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ-साथ कंपोनेंट्स और मेमोरी चिप के घरेलू निर्माण पर जोर भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में अहम कदम साबित हो सकता है।


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