सीजेपी (Campaign for Justice and Peace) के प्रवक्ता सौरव दास ने सामाजिक कार्यकर्ता रुचिका सिंह द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई कथित अभद्र टिप्पणी को लेकर उनकी गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रदर्शन के दौरान किसी व्यक्ति ने अपशब्दों का इस्तेमाल किया है, तो उसकी आलोचना की जा सकती है, लेकिन इसके लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल करना उचित नहीं माना जाना चाहिए।
सौरव दास ने कहा कि किसी व्यक्ति के बयान से असहमति होना अलग बात है, लेकिन उसे पुलिस कार्रवाई के जरिए निशाना बनाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने पूछा कि क्या केवल गाली देना अपने आप में हर परिस्थिति में आपराधिक अपराध माना जा सकता है। उनके अनुसार, इस मुद्दे पर कानूनी कार्रवाई के बजाय संतुलित और संवैधानिक दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
उन्होंने अपने बयान में संसद सदस्यों का भी उल्लेख किया और कहा कि कई जनप्रतिनिधियों पर विभिन्न आपराधिक मामलों में आरोप दर्ज हैं। उनका तर्क था कि यदि गंभीर आरोपों वाले मामलों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती, जबकि किसी कथित अपमानजनक टिप्पणी पर तुरंत पुलिस कार्रवाई की जाती है, तो इससे कानून के समान अनुप्रयोग को लेकर सवाल उठते हैं।
सौरव दास ने कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करना उचित नहीं कहा जा सकता, लेकिन ऐसी घटनाओं में आपराधिक तंत्र का उपयोग करने के बजाय कानून के दायरे और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने इस तरह की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष और समान कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए।
यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर कुछ लोग आपत्तिजनक टिप्पणियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के इस्तेमाल को लेकर भी बहस जारी है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।