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45 की उम्र के बाद बदलने लगता है 'गट माइक्रोबायोम': जानिए बढ़ती उम्र और सेहत पर इसका असर

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Posted On:Wednesday, July 8, 2026


हमारे पेट और पाचन तंत्र में अरबों बैक्टीरिया, वायरस और कवक (Fungi) का एक पूरा संसार बसता है, जिसे मेडिकल भाषा में गट माइक्रोबायोम (Gut Microbiome) कहा जाता है। यह माइक्रोबायोम भोजन पचाने, पोषक तत्वों को सोखने और हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मजबूत रखने में सबसे अहम भूमिका निभाता है।
हाल ही में आई हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, 45 वर्ष की उम्र पार करते ही इंसान के शरीर में कई तरह के जैविक बदलाव आते हैं, जिसका सीधा असर पेट के इन गुड बैक्टीरिया (अच्छे बैक्टीरिया) पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर गट माइक्रोबायोम में आने वाले बदलावों को समझकर हम कई गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं।
45 के बाद पेट में क्या बदलते हैं समीकरण?
मशहूर डायटिशियन कनिका मल्होत्रा के अनुसार, 45 वर्ष के बाद पेट के बैक्टीरिया में मुख्य रूप से ये बदलाव देखे जाते हैं:

  • अच्छे बैक्टीरिया की कमी: पेट के स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने वाले फायदेमंद बैक्टीरिया, जैसे Faecalibacterium और Akkermansia की संख्या तेजी से घटने लगती है। वहीं, नुकसानदेह बैक्टीरिया बढ़ने लगते हैं।
  • पाचन और मेटाबॉलिज्म का धीमा होना: अच्छे बैक्टीरिया की कमी से खाना धीरे पचता है, पेट फूलने (Bloating) की समस्या बढ़ती है और मेटाबॉलिज्म धीमा होने के कारण वजन को नियंत्रित रखना मुश्किल हो जाता है।
  • 'लीकी गट' और बॉडी पेन: उम्र बढ़ने के साथ आंतों की दीवारें कमजोर और अधिक पारगम्य (Permeable) हो जाती हैं। इसे 'लीकी गट' (Leaky Gut) कहा जाता है। इसके कारण पेट के टॉक्सिन्स (जहरीले तत्व) सीधे खून में मिल जाते हैं, जिससे जोड़ों का दर्द, थकान, और मानसिक धुंधलापन (Brain Fog) होने लगता है।
उम्र बनाम लाइफस्टाइल: असली विलेन कौन?
वैज्ञानिकों का मानना है कि उम्र बढ़ने के साथ आंतों में होने वाले बदलावों में केवल 30% भूमिका जैविक उम्र (Biological Age) की होती है। बाकी 70% असर हमारी जीवनशैली (Lifestyle), खान-पान, तनाव और दवाओं के इस्तेमाल से तय होता है। इसका मतलब है कि अपनी आदतों को सुधारकर हम इसे काफी हद तक ठीक रख सकते हैं।
मिडलाइफ (45+) में पेट को स्वस्थ रखने के आसान उपाय:
विशेषज्ञों ने आंतों को युवा और सेहतमंद बनाए रखने के लिए कुछ खास सुझाव दिए हैं:
  • फाइबर की मात्रा बढ़ाएं: रोज अपनी डाइट में 30 से 35 ग्राम फाइबर शामिल करें। इसके लिए हरी सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और बीज (Seeds) खाएं। यह पेट के अच्छे बैक्टीरिया का मुख्य भोजन है।
  • फरमेंटेड फूड (खमीर वाले भोजन): आंतों में लाइव बैक्टीरिया की संख्या बढ़ाने के लिए हफ्ते में कम से कम 2-3 बार दही, छाछ, इडली या डोसा जैसी चीजों का सेवन करें।
  • पॉलीफेनोल से भरपूर चीजें: जामुन (Berries), ग्रीन टी और हल्दी का सेवन करें। ये चीजें पेट के बैक्टीरिया के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाती हैं।
  • अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड से दूरी: पैकेटबंद खाना, बहुत अधिक चीनी और मैदे से बनी चीजों को सीमित करें, क्योंकि ये हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ावा देती हैं।
  • शारीरिक गतिविधि और नींद: रोजाना कम से कम 30 मिनट की वॉक या एक्सरसाइज करने से पेट के बैक्टीरिया की विविधता बढ़ती है। इसके साथ ही 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद और तनाव कम करने के लिए योग बेहद जरूरी हैं।
निष्कर्ष: 45 की उम्र जीवन का वह पड़ाव है जब लाइफस्टाइल में किए गए छोटे-छोटे सकारात्मक बदलाव आने वाले बुढ़ापे को अधिक स्वस्थ और ऊर्जावान बना सकते हैं।


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