नाटिंगघम: भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के तीसरे मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम को एक बेहद कड़क और विखंडनकारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। ट्रेंट ब्रिज की धीमी पिच पर इंग्लैंड के तेज गेंदबाजों—जोश टंग और जोफ्रा आर्चर—ने अपनी घातक लाइन-लेंथ से भारतीय बल्लेबाजी क्रम के इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस सांख्यिकी महामुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड की टीम ने सलामी बल्लेबाज फिल साल्ट के शानदार 70 रनों और सैम करन के नाबाद 41 रनों की बदौलत 7 विकेट पर 201 रनों का चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया था। जवाब में, 202 रनों के कड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम महज 11.4 ओवरों में सिर्फ 76 रनों के स्कोर पर कड़ाई से सिमट गई, जिसके चलते इंग्लैंड ने यह मैच 125 रनों के विशाल अंतर से जीतकर श्रृंखला में 2-0 की विधिक बढ़त बना ली है।
इस मैच के रणनीतिक लॉजिस्टिक्स का विश्लेषण करें तो भारतीय टीम के लिए पावरप्ले की शुरुआत किसी बुरे सपने जैसी रही। टी20 अंतरराष्ट्रीय इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ जब टीम इंडिया ने पावरप्ले के भीतर ही अपने शीर्ष 5 विकेट कूटनीतिक रूप से गंवा दिए। इंग्लैंड की कड़क गेंदबाजी के सामने भारत के केवल चार बल्लेबाज ही दहाई का आंकड़ा छू सके, जिसमें युवा वैभव सूर्यवंशी और विकेटकीपर ईशान किशन द्वारा बनाए गए 13-13 रन ही टीम का सर्वोच्च स्कोर रहे। कप्तान श्रेयस अय्यर (5), अभिषेक शर्मा (10), अक्षर पटेल (10) और तिलक वर्मा (3) जैसे स्थापित सितारे पूरी तरह फ्लॉप साबित हुए, जिससे टीम इंडिया अपने इस प्रारूप के दूसरे सबसे न्यूनतम सांख्यिकी स्कोर पर ढेर हो गई।
इंग्लैंड की जीत के मुख्य सूत्रधार रहे जोश टंग ने महज 28 रन देकर 4 विकेट चटकाए, जबकि घातक यॉर्कर डालने वाले जोफ्रा आर्चर ने 29 रन देकर 3 महत्वपूर्ण विकेट अपने नाम किए और उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' के विधिक पुरस्कार से नवाजा गया। इससे पहले भारत की ओर से गेंदबाजी में हर्षित राणा और प्रिंस यादव ने जरूर 2-2 विकेट लेकर कड़ा संघर्ष किया, लेकिन वे साल्ट और करन के विखंडनकारी आक्रमण को रोकने में नाकाम रहे। इस विवादित हार के बाद भारतीय टीम प्रबंधन पर आगामी मैचों के लिए अपनी बल्लेबाजी रणनीति और तकनीकी सुरक्षा कवच को कड़ाई से अपग्रेड करने का भारी दबाव बन गया है।