वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 'त्वरित और निर्णायक जीत' के बार-बार दिए गए आश्वासनों के बावजूद, अमेरिका और ईरान के बीच भड़का सैन्य संघर्ष अगले सप्ताह छह महीने के पड़ाव पर पहुंचने वाला है। शुरुआती दौर में सीमित और रणनीतिक हमलों का दावा किए जाने के बाद, अब यह संघर्ष एक लंबे और थकाऊ युद्ध में बदल चुका है, जिससे न केवल मध्य पूर्व में स्थिरता संकट में है, बल्कि अमेरिकी रक्षा तैयारियों और नौसैनिक संसाधनों पर भी अभूतपूर्व दबाव देखा जा रहा है।
एक्सियोस (Axios) की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध के खिंचने से अमेरिकी पेंटागन के गोला-बारूद के घटते भंडार और नौसैनिक बलों की अंतहीन तैनाती पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पश्चिम एशिया में आठ महीने से अधिक समय से तैनात विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) पर तैनात नौसैनिकों में बढ़ते मानसिक तनाव, कुप्रबंधन और कठोर परिस्थितियों की रिपोर्टों ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब प्रशांत महासागर में तैनात 'यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन' को लिंकन की जगह भेजने की तैयारी की जा रही है।
वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप के सोशल मीडिया दावों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी अधिकार जमाने के बयानों ने राजनयिक हलकों को चौंका दिया है। पेंटागन द्वारा महीनों से नियमित प्रेस ब्रीफिंग न आयोजित करने और कैजुअल्टी ट्रैकर को पारदर्शी न रखने के आरोपों के बीच, अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य अब राष्ट्रपति की युद्ध शक्तियों (War Powers) पर लगाम लगाने और इस अंतहीन संघर्ष का कूटनीतिक समाधान खोजने की मांग कर रहे हैं।