नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगस्त बैठक का ब्योरा जारी हो गया है, जिसमें समिति के सदस्यों ने खुदरा मुद्रास्फीति (Inflation) में संभावित उछाल को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा सहित एमपीसी सदस्यों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक और सैन्य संघर्षों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसके साथ ही कच्चे तेल, ईंधन और औद्योगिक कच्चे माल की लागत बढ़ने से चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में खुदरा महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है।
मिनट्स के अनुसार, समिति के सदस्य डॉ. नागेश कुमार और प्रो. राम सिंह ने रेखांकित किया कि भले ही भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर उम्मीद से बेहतर बनी हुई है, लेकिन अल नीनो के कारण कृषि क्षेत्र में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय निर्यात पर अतिरिक्त सीमा शुल्क (Tariffs) का दबाव चिंता का विषय है। बढ़ती ईंधन दरों के कारण कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ रहा है, जिसका असर आने वाले महीनों में उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में देखने को मिल सकता है। इन्हीं वैश्विक अनिश्चितताओं और खाद्य-ईंधन श्रेणियों में अस्थिरता को देखते हुए रिजर्व बैंक ने फिलहाल नीतिगत ब्याज दरों (Repo Rate) में कोई बदलाव न करने और स्थिति पर सतर्क नजर बनाए रखने का फैसला किया है।