टॉक्सिक मूवी रिव्यू: यश के स्वैग, एक्शन और इमोशन का दमदार मेल
यश की दमदार मौजूदगी और फिल्म का बड़ा स्केल इसे थिएटर में देखने लायक बनाते हैं।
डायरेक्टर: गीतू मोहनदास
कास्ट: यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत
ड्यूरेशन: 3 घंटे 14 मिनट
यश की फिल्मों का इंतजार सिर्फ उनके फैंस ही नहीं, बल्कि बॉक्स ऑफिस भी करता है। टॉक्सिक, आखिरकार ओणम और ईद-ए-मिलाद के मौकेपर सिनेमाघरों में पहुंच गई है। त्योहारों की छुट्टियां, यश की बड़ी फैन फॉलोइंग और फिल्म का बड़ा स्केल इसे शानदार शुरुआत के लिए मजबूतमौका देते हैं। मेकर्स ने भी फिल्म को छुट्टी के मौके पर रिलीज करने के लिए लंबा इंतजार किया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा दर्शक थिएटर तक पहुंचें।ट्रेड में उम्मीद है कि अगर दर्शकों का रिस्पॉन्स अच्छा रहा, तो फिल्म पहले दिन ही 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर सकती है। यश के फैंस केलिए तो यह रिलीज किसी जश्न से कम नहीं है।
हालांकि, टॉक्सिक को सिर्फ यश की स्टार पावर के भरोसे चलने वाली फिल्म कहना सही नहीं होगा। गीतू मोहनदास ने गैंगस्टर ड्रामा को एक अलगदुनिया में रखा है, जहां अपराध और एक्शन के साथ परिवार, प्यार और रिश्ते भी कहानी का हिस्सा हैं। फिल्म का टाइटल जिस फेयरी टेल की बातकरता है, उसका अंदाज भी यहां देखने को मिलता है। कहानी सीधे-सीधे सब कुछ बताने के बजाय धीरे-धीरे अपने किरदारों और उनके रिश्तों की परतेंखोलती है।
फिल्म अपनी दुनिया को समझाने में समय लेती है। पहला हिस्सा ड्रामा, एक्शन और मास अपील वाले पलों के साथ आगे बढ़ता है। साथ ही, किरदारों को समझने और उनके मकसद जानने का मौका भी मिलता है। शुरुआत में फिल्म थोड़ी धीमी लग सकती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगेबढ़ती है, इसमें दिलचस्पी बढ़ती जाती है। इंटरवल के आसपास कहानी एक बड़ा मोड़ लेती है और यही हिस्सा दर्शकों को दूसरे भाग के लिए उत्सुककरता है।
यश फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं। वह राया और उसके बेटे टिकट के दो किरदार निभाते हैं। दोनों किरदारों का अंदाज और ऊर्जा अलग है। रायागैंगस्टर की दुनिया के बीच खड़ा नजर आता है, जबकि टिकट कहानी में एक भावनात्मक पहलू लेकर आता है। यश दोनों किरदारों के बीच फर्क बनाएरखते हैं। उनका लुक, स्क्रीन प्रेजेंस, संवाद और एक्शन सीन फिल्म के बड़े आकर्षण हैं। खास बात यह है कि वह सिर्फ एक्शन और स्वैग तक सीमितनहीं रहते, बल्कि भावनात्मक दृश्यों में भी अपनी छाप छोड़ते हैं।
फिल्म में नयनतारा हमें गंगा के रोल में नजर आती है, और कियारा आडवाणी के किरदार का नाम नादिया है. दोनों किरदार कहानी में भावनात्मक पक्षको मजबूत करते हैं। कियारा अपने किरदार में अपनापन लेकर आती हैं, जबकि नयनतारा परिवार और रिश्तों वाले हिस्से को मजबूती देती हैं। हुमाकुरैशी हमें एलिजाबेथ के रोल में नजर आती है, जो कहानी में अपनी अलग मौजूदगी दर्ज कराती हैं। वहीं रुक्मिणी वसंत के किरदार का नाम मेलिसाहै. और वह इस फिल्म में एक सरप्राइज पैकेज की तरह सामने आती हैं। तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, डेरेल डी'सिल्वा और सुदेव नायर भी अपनीभूमिकाओं के जरिए फिल्म की दुनिया को आगे बढ़ाते हैं।
दूसरे हिस्से में फिल्म का एक्शन काफी बड़ा हो जाता है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, गैंगस्टर ड्रामा एक बड़े एक्शन एंटरटेनर में बदल जाता है।एक्शन सीक्वेंस में रफ्तार और ऊर्जा दोनों बढ़ जाती हैं। कई दृश्य साफ तौर पर बड़े पर्दे को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं और इन पलों में यश पूरीतरह छा जाते हैं। फिल्म के एक्शन में एक कच्चापन है, जो इसकी अलग दुनिया के साथ अच्छी तरह मेल खाता है।
इसके बावजूद फिल्म अपने भावनात्मक हिस्से को पीछे नहीं छोड़ती। परिवार, प्यार, भरोसा और वफादारी कहानी में लगातार बने रहते हैं। राया, टिकट, गंगा और नादिया के रिश्ते फिल्म को एक भावनात्मक आधार देते हैं। यही रिश्ते एक्शन को सिर्फ दिखावे से आगे ले जाते हैं। जब कहानी में कोई बड़ाएक्शन मोमेंट आता है, तो उसके पीछे किरदारों से जुड़ी भावनाएं भी होती हैं।
क्लाइमेक्स में भी फिल्म एक सरप्राइज़ लेकर आती है। जब आपको लगता है कि कहानी की दिशा समझ में आ गई है, तभी एक नया मोड़ सामनेआता है। इससे कहानी में एक और परत जुड़ती है। फिल्म का अंत सिर्फ बड़े एक्शन के साथ खत्म होने के बजाय दर्शक के लिए कुछ सवाल भीछोड़ता है, जिनके बारे में वह थिएटर से बाहर निकलने के बाद सोचता है।
गीतू मोहनदास ने एक जानी-पहचानी गैंगस्टर कहानी को अपने अंदाज में पेश करने की कोशिश की है। इसमें कुछ नया दिखाने की कोशिश साफ नजरआती है। फिल्म का अपना विजुअल अंदाज है, अपनी दुनिया है और किरदारों की अपनी कहानियां हैं। यह सिर्फ यश की स्टार पावर दिखाने वालीफिल्म नहीं बनना चाहती, बल्कि एक बड़ी कहानी और अलग एक्सपीरियंस देने की कोशिश करती है।
कुल मिलाकर, टॉक्सिक में यश के फैंस के लिए एक्शन और स्वैग की भरपूर खुराक है, जबकि आम दर्शकों के लिए परिवार, रिश्ते और ड्रामा भी मौजूदहैं। फिल्म लंबी जरूर है, लेकिन बड़े पर्दे पर इसका स्केल और एक्शन असर छोड़ता है। त्योहारों की छुट्टी और यश की फैन फॉलोइंग इसे बॉक्सऑफिस पर मजबूत शुरुआत दे सकती है। अगर दर्शकों का साथ मिला, तो 100 करोड़ की ओपनिंग का आंकड़ा भी फिल्म की पहुंच से दूर नहींहोगा।
टॉक्सिक हर दर्शक के लिए एक जैसी फिल्म नहीं हो सकती, लेकिन यश के फैंस और बड़े पर्दे पर एक्शन पसंद करने वालों के लिए इसमें काफी कुछ है। गीतू मोहनदास का अलग अंदाज, यश की दमदार मौजूदगी और फिल्म का बड़ा स्केल इसे थिएटर में देखने लायक बनाते हैं।